कटनी

दूरी होगी कम, आसान होगा सफर, इंडस्ट्रियल लॉजिस्टिक्स हब का काम करेगा कटनी-सिंगरौली लिंक एक्सप्रेस-वे, भोपाल, रीवा, प्रयागराज, वाराणसी तक मिलेगी हाईस्पीड कनेक्टिविटी

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कटनी, यशभारत। कटनी-सिंगरौली सडक़ मार्ग को केन्द्र सरकार ने महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में शामिल किया है। 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ के आयोजन को लेकर कटनी-सिंगरौली एक्सप्रेस-वे का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इस हाईवे के निर्माण से प्रयागराज, वाराणसी जैसे शहरों की कनेक्टिविटी मप्र से और ज्यादा हो जाएगी, जबकि छत्तीसगढ़ से भी दूरी कम हो जाएगी। 232 किलोमीटर के इस हाईस्पीड एक्सप्रेसवे की डीपीआर मप्र रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा बनाई जा रही है। इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद सिंगरौली की दूरी सीधी, रीवा, कटनी, भोपाल और उज्जैन से काफी ज्यादा घट जाएगी, जबकि कटनी से सिंगरौली के बीच की दूरी भी घटकर 3.30 घंटे के बीच सिमट जाएगी।
कटनी-सिंगरौली एक्सप्रेसवे महाकौशल के प्रवेश द्वार कटनी और सिंगरौली उत्तरप्रदेश की सीमा से सटा हुआ है जो दोनों शहरों को जोडऩे का काम करता है, साथ ही यह रीवा, सीधी, दमोह और राजधानी भोपाल को भी हाईस्पीड लिंक देगा। सिंगरौली की सीमा उत्तरप्रदेश के सोनभद्र जिले से लगती है। यह एक्सप्रेसवे मध्यप्रदेश से उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर सोनभद्र, मिर्जापुर, प्रयागराज और वाराणसी के लिए व्यापारिक ट्रैफिक को बेहद आसान बना देगा। सिंगरौली और सीधी के रास्ते यह कॉरिडोर छत्तीसगढ़ के उत्तरी जिलों और झारखंड के कोयला बेल्ट जिसमें धनबाद, रांची रूट को जोडऩे वाले भारी माल वाहनों के लिए एक सुगम इंडस्ट्रियल लॉजिस्टिक्स हब का काम करेगा।
कटनी से सिंगरौली की कम होगी दूरी
कटनी और सिंगरौली के बीच की दूरी 299 किलोमीटर है। दोनों शहरों के सफर में अभी करीब 6 घंटे का समय लगता है लेकिन इस एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद दोनों शहरों के बीच की दूरी घटकर 232 किलोमीटर के बीच आ जाएगी। यानी कटनी और सिंगरौली के बीच 67 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। यात्रा का समय भी साढ़े 3 घंटे हो जाएगा। दोनों शहरों के बीच यात्रा में करीब पौने 3 घंटे की बचत हो जाएगी।
वाराणसी-शक्तिनगर हाईवे से कनेक्टिविटी
कटनी-सिंगरौली एक्सप्रेसवे सीधे वाराणसी-शक्तिनगर हाईवे से कनेक्ट होगा। सिंगरौली से उत्तरप्रदेश के वाराणसी को जोडऩे वाला वाराणसी शक्तिनगर फोरलेन हाईवे पहले से ही चालू है। कटनी सिंगरौली एक्सप्रेसवे सीधे इस रूट को फीड करेगा। इसका मतलब है कि कटनी या भोपाल से चलने वाला कोई भी वाहन इस एक्सप्रेसवे से होते हुए बिना किसी ट्रैफिकजाम के सीधे वाराणसी और मिर्जापुर के हाईवे नेटवर्क पर पहुंच जाएगा। ऐसे में दोनों राज्यों के बीच न केवल कनेक्टिविटी मजबूत होगी, बल्कि समय की भी बचत होगी, इसके अलावा प्रदेश के धार्मिक स्थल मैहर शारदा देवी मंदिर और जबलपुर के भेड़ाघाट की दूरी भी यूपी के प्रमुख धार्मिक केंद्रों बनारस और प्रयागराज से कम हो जाएगी।
मिलेगा हाई-स्पीड बाईपास रूट
इस एक्सप्रेसवे के बनने से छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी भी बढ़ जाएगी। यह हाईवे अंबिकापुर और मनेंद्रगढ़ तक कनेक्ट होगा। छत्तीसगढ़ के ये प्रमुख उत्तरी शहर सिंगरौली और सीधी के रास्ते इस एक्सप्रेसवे से सीधे लिंक हो जाएंगे, इसके अलावा रायपुर और बिलासपुर से कटनी, जबलपुर और भोपाल आने जाने वाले वाहनों को विंध्य क्षेत्र में एक हाई-स्पीड बाईपास रूट मिल जाएगा।

 

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