
सड़क किनारे लगी कलेक्टर की पाठशाला
बच्चों के साथ बिताए यादगार पल
इंट्रो👇
खदान निरीक्षण से लौटते समय बच्चों से की पढ़ाई की बात, पहाड़े और एबीसीडी सुनकर बढ़ाया हौसला, नन्हे शिवराज के स्कूल में दाखिले की दिलाई प्रेरणा
कटनी,यशभारत। सरकारी बैठकों और निरीक्षणों के बीच अक्सर प्रशासनिक अधिकारी व्यस्त नजर आते हैं, लेकिन बुधवार को कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी का एक अलग ही मानवीय रूप देखने को मिला। स्लीमनाबाद क्षेत्र के ग्राम निमास स्थित मार्बल खदान का निरीक्षण कर लौट रहे कलेक्टर की नजर छोटे कछारगांव के पास स्कूल से घर लौट रहे बच्चों पर पड़ी तो उन्होंने अपना काफिला रुकवा दिया। कुछ ही पलों में सड़क किनारे बच्चों की छोटी-सी महफिल सज गई और माहौल किसी खुली पाठशाला में बदल गया।
कलेक्टर ने बच्चों से उनका नाम, कक्षा और स्कूल के बारे में जानकारी ली। बच्चों ने बताया कि वे निमास माध्यमिक शाला और कछार गांव की प्राथमिक शाला में पढ़ते हैं। इसके बाद कलेक्टर ने बच्चों की पढ़ाई भी परखी। सातवीं की छात्रा महिमा ठाकुर से दो और चार का पहाड़ा सुना और गणित के कुछ सवाल पूछे। महिमा ने बिना झिझक सभी सवालों के सही जवाब दिए। उसकी प्रतिभा से प्रभावित होकर कलेक्टर ने उसे कॉपी और पेन भेंट किया।
इसी दौरान दूसरी कक्षा के छात्र प्रिंस ठाकुर ने पूरी एबीसीडी सुनाई। उसकी तैयारी देखकर कलेक्टर ने उसे भी पेन देकर प्रोत्साहित किया। बच्चों की मुस्कान और आत्मविश्वास ने वहां मौजूद ग्रामीणों का भी ध्यान खींच लिया।
बातचीत के दौरान कलेक्टर की नजर रागिनी ठाकुर के छोटे भाई शिवराज पर पड़ी, जो अभी स्कूल नहीं जाता है। कलेक्टर ने रागिनी को समझाया कि शिवराज का जल्द से जल्द स्कूल में नामांकन कराएं। उन्होंने बताया कि स्कूल में दाखिले के बाद उसे निःशुल्क ड्रेस, पाठ्यपुस्तकें, मध्यान्ह भोजन और शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलेगा, जिससे उसकी पढ़ाई और भविष्य दोनों बेहतर होंगे।
नन्हे शिवराज की मासूमियत ने इस मुलाकात को और भी खास बना दिया। कलेक्टर के सवालों का उसने अपने भोले और मजाकिया अंदाज में जवाब दिया, जिसे सुनकर कलेक्टर सहित मौजूद अधिकारी और ग्रामीण मुस्कुरा उठे। कुछ देर तक सड़क किनारे बच्चों के बीच हंसी, सीख और अपनापन का माहौल बना रहा।
इस दौरान प्रशिक्षु आईएएस श्लोक वाईकर, एसडीएम बहोरीबंद प्रदीप मिश्रा, उपसंचालक खनिज रत्नेश दीक्षित और महाप्रबंधक उद्योग ज्योति सिंह भी मौजूद रहे। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच बच्चों के साथ बिताए गए ये पल न सिर्फ उनके लिए यादगार रहे, बल्कि यह संदेश भी दे गए कि शिक्षा की ओर बढ़ाया गया एक छोटा कदम किसी बच्चे का भविष्य बदल सकता है।







