बच्चों की मौतों के बीच फिर एक मासूम ने तोड़ा दम : अस्पताल से घर लौटने के कुछ दिन बाद बिगड़ी आकाश की हालत….मौतों के आंकड़े पर अब भी सवाल, स्वास्थ्य विभाग 8 पर कायम

बालाघाट/बिरसा। बिरसा क्षेत्र में बच्चों की लगातार हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रभावित अडोरी पंचायत के उसेकलटोला गांव में तीन वर्षीय आकाश धुर्वे की मंगलवार को मौत हो गई। खास बात यह है कि आकाश को कुछ दिन पहले ही जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उपचार के बाद उसे घर भेजा गया था। घर लौटने के तीन-चार दिन बाद उसकी तबीयत फिर बिगड़ी और उसकी मौत हो गई।

आकाश की मौत ने क्षेत्र में पहले से चल रहे उस विवाद को एक बार फिर सामने ला दिया है, जिसमें बच्चों की मौतों की संख्या और उनके वास्तविक कारणों को लेकर प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों के अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
परिजनों के अनुसार आकाश को 4 अगस्त को बुखार के चलते जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चार दिन उपचार के बाद 8 अगस्त को उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। परिजन उसे लेकर गांव लौटे, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उसकी तबीयत दोबारा खराब हो गई।
मंगलवार को आकाश ने दम तोड़ दिया। उसकी मौत की वजह अभी आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं हुई है। शव का पोस्टमार्टम कराया गया है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
21 मौतों का दावा, विभाग के रिकॉर्ड में 8
आकाश की मौत के बाद क्षेत्र में बच्चों की मौतों का आंकड़ा 21 तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग अब तक 8 मौतों की ही पुष्टि कर रहा है।
यही आंकड़ों का अंतर इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। ग्रामीण और विपक्ष जहां अधिक संख्या में बच्चों की मौत का दावा कर रहे हैं, वहीं स्वास्थ्य विभाग सभी मामलों को एक ही बीमारी से जोड़ने से इनकार कर रहा है।
पहले भी सामने आ चुकी हैं बच्चों की मौतें
इससे पहले भी बिरसा के आदिवासी क्षेत्र से बच्चों के बीमार होने और अस्पताल में भर्ती होने के मामले लगातार सामने आए हैं। बड़ी संख्या में बच्चों के अस्पताल पहुंचने के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी बढ़ाई गई थी। बच्चों की मौतों को लेकर ग्रामीणों में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है।
पिछली घटनाओं के बाद मौतों के कारणों की जांच और स्वास्थ्य टीमों की निगरानी को लेकर प्रशासन की ओर से कार्रवाई की गई थी। इसके बावजूद अब आकाश की मौत ने सवाल खड़ा कर दिया है कि प्रभावित क्षेत्र में बच्चों की बीमारी और मौतों की वास्तविक वजह आखिर क्या है।
महामारी जैसे गंभीर लक्षण नहीं थे
सीएमएचओ डॉ. परेश उपलप के अनुसार आकाश में गांव में सामने आ रही बीमारी जैसे गंभीर लक्षण नहीं थे। उनके मुताबिक बच्चे की गर्दन में सूजन थी और जन्म से ही उसकी गर्दन एक तरफ झुकी हुई थी।
सीएमएचओ ने संभावना जताई कि खाना या दूध श्वास नली में जाने से सांस लेने में परेशानी हुई होगी। हालांकि उन्होंने भी मौत का अंतिम कारण पोस्टमार्टम और चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्पष्ट होने की बात कही है।






