सरकारी अस्पताल का खौफनाक सच! : बजट फाइलों में दफन, अस्पताल में ‘पोस्टमार्टम’

नरसिंहपुर\ गोटेगांव |जिस अस्पताल में मरीज जिंदगी की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, उसी अस्पताल में अगर पोस्टमार्टम होने लगे तो सोचिए वहां का माहौल कैसा होगा। नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में व्यवस्था की यही तस्वीर सामने आई है। 1970 में बना पोस्टमार्टम भवन जर्जर होकर पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। अब मजबूरी में अस्पताल परिसर की मर्चुरी में पोस्टमार्टम किए जा रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि नए पीएम भवन के लिए 10 लाख रुपये स्वीकृत होने के बावजूद आज तक निर्माण शुरू क्यों नहीं हुआ?
किसी भी संदिग्ध मौत या सड़क हादसे के बाद सच्चाई तक पहुंचने का सबसे अहम जरिया होता है पोस्टमार्टम। यही वैज्ञानिक जांच पुलिस की तफ्तीश को दिशा देता है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की नींव बनता है। इसी उद्देश्य से साल 1970 में गोटेगांव के शांति धाम के पास पोस्टमार्टम भवन बनाया गया था। लेकिन पांच दशक से ज्यादा पुराना यह भवन अब खुद ही इतिहास बन चुका है। भवन इतना जर्जर हो गया कि विभागीय इंजीनियर ने इसे डिस्मेंटल घोषित कर दिया और आखिरकार इसे ध्वस्त करना पड़ा।
भवन टूटने के बाद अब पोस्टमार्टम की पूरी व्यवस्था नगर के बीचों-बीच स्थित पुराने शासकीय अस्पताल परिसर की मर्चुरी में कर दी गई है। यानी जहां मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं, वहीं कुछ दूरी पर शवों का पोस्टमार्टम भी हो रहा है। इससे अस्पताल का माहौल प्रभावित हो रहा है। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल में पहले से ही लोग तनाव और चिंता की स्थिति में आते हैं, ऐसे में पोस्टमार्टम की गतिविधियां उन्हें मानसिक रूप से और ज्यादा विचलित करती हैं।
सिर्फ मरीज ही नहीं, पोस्टमार्टम करने वाले कर्मचारियों की मुश्किलें भी कम नहीं हैं। सीमित संसाधनों और पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में उन्हें काम करना पड़ रहा है। जिस स्थान पर यह व्यवस्था चल रही है, वहां आधुनिक पोस्टमार्टम भवन जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में कर्मचारियों को भी कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि नए पोस्टमार्टम भवन के निर्माण के लिए शासन पहले ही 10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत कर चुका है। लेकिन सरकारी फाइलों की रफ्तार इतनी धीमी है कि आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। सवाल यह है कि आखिर स्वीकृत राशि के बाद भी निर्माण में देरी किस वजह से हो रही है? जिम्मेदार विभाग कब जागेगा और गोटेगांव को उसका नया पोस्टमार्टम भवन मिलेगा?
आज गोटेगांव के लोग सिर्फ एक नए भवन की मांग नहीं कर रहे, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं जहां अस्पताल में इलाज कराने आने वालों को मौत का मंजर न देखना पड़े और पोस्टमार्टम जैसी संवेदनशील प्रक्रिया अपने निर्धारित स्थान पर ही हो। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक कार्रवाई करता है या फिर 10 लाख की स्वीकृति यूं ही फाइलों में दबी रह जाएगी।







