
लखनऊ,यशभारत। लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाते हुए त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मामले में प्रथम दृष्टया लापरवाही के दोषी पाए गए चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि चार आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। सरकार ने पूरे प्रकरण की गहन जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।
मुख्यमंत्री ने देर रात अपने सरकारी आवास पर उच्चस्तरीय बैठक कर घटना की समीक्षा की। बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सीएम ने दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री के आदेश पर गठित एसआईटी में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के एडीजी प्रवीण कुमार को सदस्य बनाया गया है। जांच दल को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपने का निर्देश दिया गया है घटना में लापरवाही बरतने के आरोप में बिजली विभाग के एक्सईएन कलेक्शन गौरव कुमार, फायर विभाग के एफएसएसओ कमलेंद्र कुमार सिंह, एलडीए के एई अनिल कुमार तथा जेई प्रमोद पांडे को निलंबित कर दिया गया है।
वहीं पुलिस ने बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, पेट शॉप संचालक रामकृष्ण उपाध्याय, एनिमेशन सेंटर संचालक तूशॉक कृष्णा जायसवाल और किरायेदार सुरेश कुमार शाहू को गिरफ्तार कर लिया है। एफआईआर में नामजद अन्य दो आरोपी धीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला की तलाश जारी है।
संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) बबलू कुमार ने बताया कि पुरनिया चौकी प्रभारी शुभम तिवारी की तहरीर पर छह नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं तथा उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की धारा 6/10 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
प्रशासन का कहना है कि घटना में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।







