जिला व्यापार केन्द्र से सब्सिडी में मिलने थे 29 लाख, हुआ 2.93 करोड़ का भुगतान, पढ़े पूरी खबर…

यशभारत डिंडौरी। आदिवासी बहुल डिंडौरी जिले में उद्योग विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश एमएसएमई प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत जारी की जाने वाली सब्सिडी में विभागीय स्तर पर इतनी बड़ी चूक हुई कि 29 लाख रुपये के भुगतान की जगह करीब 2 करोड़ 93 लाख रुपये हितग्राही के खाते में पहुंच गए। मामले की जानकारी सामने आने के बाद जिला मुख्यालय से लेकर भोपाल तक प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई।
जानकारी के अनुसार जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र डिंडौरी द्वारा मेसर्स नर्मदा राइस मिल इकाई, कोहका को एमएसएमई प्रोत्साहन योजना के तहत 29 लाख 34 हजार 722 रुपये की सब्सिडी राशि जारी की जानी थी। लेकिन भुगतान प्रक्रिया में हुई त्रुटि के कारण निर्धारित राशि से लगभग दस गुना अधिक 2 करोड़ 93 लाख 47 हजार 223 रुपये संबंधित खाते में ट्रांसफर कर दिए गए।
बताया जा रहा है कि अतिरिक्त भुगतान की राशि करीब 2 करोड़ 64 लाख 12 हजार 500 रुपये थी। खाते में अचानक इतनी बड़ी राशि आने पर हितग्राही पक्ष भी हैरान रह गया। मामले की गंभीरता को समझते हुए हितग्राही ने स्वयं आगे आकर विभाग को इसकी जानकारी दी और अतिरिक्त राशि लौटाने की प्रक्रिया शुरू की।
हितग्राही ने दिखाई ईमानदारी, शासन को बचाया करोड़ों का नुकसान
मामले में राइस मिल इकाई की प्रोपराइटर रिचा राजपाल ने विभाग को लिखित पत्र देकर बताया कि उनके खाते में निर्धारित राशि से कहीं अधिक सब्सिडी जमा हुई है। पत्र में उन्होंने अतिरिक्त राशि वापस जमा करने के लिए शासन का खाता नंबर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
रिचा राजपाल के पति रमेश राजपाल ने बताया कि खाते में असामान्य राशि आने की जानकारी लगते ही उन्होंने बैंक प्रबंधन से संपर्क किया और उद्योग विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया। इसके बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर अतिरिक्त राशि शासन के खाते में वापस जमा करा दी गई।
विभागीय व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र की भुगतान प्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब प्रदेश में कई हितग्राही सब्सिडी की प्रतीक्षा कर रहे हैं, तब इस तरह की वित्तीय त्रुटि प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि भुगतान जारी होने से पहले सत्यापन, स्वीकृति, राशि मिलान और वित्तीय जांच की प्रक्रिया किस स्तर पर चूक गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हितग्राही स्वयं जानकारी नहीं देते तो शासन को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता था।
अधिकारी ने क्या कहा…
जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र डिंडौरी की महाप्रबंधक राधिका कुसरे ने बताया कि रिचा राजपाल के नाम से लगभग 29 लाख रुपये की सब्सिडी जारी की जानी थी, लेकिन हेड ऑफिस स्तर पर तकनीकी या प्रक्रिया संबंधी त्रुटि के कारण लगभग 3 करोड़ रुपये उनके खाते में पहुंच गए। जैसे ही इसकी जानकारी मिली, संबंधित हितग्राही ने स्वयं विभाग को सूचित किया और अतिरिक्त राशि शासन के खाते में वापस जमा करा दी गई।
उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है तथा यह भी देखा जा रहा है कि कहीं अन्य भुगतान मामलों में भी ऐसी कोई त्रुटि तो नहीं हुई है। भविष्य में भुगतान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक सतर्कता, वित्तीय नियंत्रण और हितग्राही की ईमानदारी—तीनों को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।







