जबलपुरमध्य प्रदेश

मझौली गेहूं घोटाला : अधिकारियों का वीडियो आया सामने, कह रहे- खरीदी कोई भी करे, कार्रवाई महिलाओं पर होगी

प्रशासन को पहले से थी जानकारी"दलाल चलाते हैं केंद्र

जबलपुर, यश भारत। मझौली गेहूं घोटाले को लेकर रोज नई जानकारियां सामने आ रही हैं। इसी बीच एक वीडियो सामने आया है, जिसमें बैठक के दौरान सिहोरा एसडीएम स्पष्ट रूप से कहती नजर आ रही हैं कि “आप खरीदी किसी से भी करवा रहे हों, हम यह नहीं पूछेंगे कि वह कौन है, कार्रवाई आप पर होगी।” यानी इस बात से स्पष्ट समझ में आता है कि प्रशासन को मालूम था कि स्व-सहायता समूहों के नाम पर बनाए गए केंद्रों पर दलाल और व्यापारी काम करते हैं, जबकि नाम महिलाओं का होता है। महिलाओं को बलि का बकरा बनाया जाता है और लाभ दूसरे लोग उठाते हैं।

केंद्र से बेचा गया है गेहूं

यश भारत को एक्सक्लूसिव जानकारी मिली है, जिसके अनुसार केंद्र में 5000 क्विंटल की अतिरिक्त फीडिंग नहीं है। यह मात्रा लगभग 3000 क्विंटल की बताई जा रही है। करीब 2000 क्विंटल गेहूं किसानों द्वारा केंद्र पर लाया गया था, जिसकी तौल भी हुई थी। इसके बाद अमन पांडे और उसके सहयोगियों द्वारा गेहूं को केंद्र से ही व्यापारियों को दे दिया गया। इस संबंध में बताया जा रहा है कि अमन पांडे ने सिहोरा और मझौली के कुछ व्यापारियों से संपर्क कर 2000 से 2100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं बेचने की बात कही थी। अब गेहूं खरीदने वाले लोगों के नाम भी सामने आने आएंगे।

फिर आरबी कंपनी के सर्वेयर ने कर दिया गोलमाल

धान घोटाले के बाद अब गेहूं घोटाले में भी गुणवत्ता संबंधी कार्य देख रही आरबी एसोसिएट्स के कर्मचारी की भूमिका सामने आ रही है। अनिल पटेल, जो ग्राउंड सर्वेयर नियुक्त था, कई दिनों से गायब बताया जा रहा है और उससे संपर्क नहीं हो पा रहा है। जबकि एंट्री के समय सर्वेयर की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। जब तक वह अपनी आईडी से रजिस्ट्रेशन को पास नहीं करता, तब तक एंट्री नहीं हो सकती। ऐसा ही मामला धान घोटाले के दौरान श्रीजी वेयरहाउस के सर्वेयर का भी सामने आया था, जिस पर पहले प्रशासन द्वारा एफआईआर नहीं की गई थी। बाद में जब यश भारत ने मामला उठाया, तब एक महीने बाद एफआईआर दर्ज की गई। लेकिन इस पूरे मामले में कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं होती। इसके कर्मचारी हर बार बड़े स्तर पर गड़बड़ी में सामने आते हैं, फिर भी न तो कंपनी और न ही उसके वरिष्ठ अधिकारियों को जांच के दायरे में लिया जाता है।

अन्नपूर्णा के स्टॉक में भी है गोलमाल

इस पूरे मामले में सिर्फ अतिरिक्त फीडिंग का मामला नहीं है। मामला अन्नपूर्णा वेयरहाउस तक भी पहुंचता है, जहां पहले से पुराना गेहूं रखा हुआ था और वहीं केंद्र बना दिया गया था। आरोप है कि नए और पुराने गेहूं के बीच खेल किया गया। साथ ही कम वजन की बोरियों को भी स्टॉक के बीच दबाकर रखा गया है। बताया जा रहा है कि गड़बड़ी सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं थी, बल्कि गोदाम के अंदर भी हुई है। हालांकि अधिकारी इस पहलू को दबाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि विवाद और न बढ़े। इस संबंध में आने वाले समय में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिसमें वेयरहाउस की भूमिका भी सामने आ सकती है।

स्लॉट ट्रांसफर की हो जांच

इस बार गेहूं उपार्जन में स्लॉट को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, जहां पर कुछ केंद्र ऐसे थे जहां क्षमता से अधिक स्लॉट बुक होने दिए गए, वहीं कुछ केंद्र ऐसे थे जहां पर 1000 से लेकर 5000 क्विंटल तक की ही खरीदी हो सकी। वहीं इन सबके बीच एक बड़ा खेल स्लॉट के ट्रांसफर को लेकर भी हुआ है, जहां पर बड़े पैमाने में स्लॉट ट्रांसफर किए गए हैं।
ऐसे में अन्नपूर्णा वेयरहाउस में जो स्लॉट ट्रांसफर करे गए थे, उनकी भी जांच होनी चाहिए। यदि यहां पर भी स्लॉट ट्रांसफर करके भेजे गए हैं, तो वह किसकी अनुशंसा से भेजे गए हैं और क्षमता से ज्यादा स्लॉट होने के बाद भी यहां पर ट्रांसफर अगर हुए हैं, तो फिर किसको फायदा पहुंचाने के लिए किए गए हैं, इस बात की भी जांच होनी चाहिए।

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