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सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश : अवैध निर्माण पर नोटिस नहीं, सीधे चले बुलडोजर

लैंड यूज बदलना सिस्टम से धोखा, देशभर के निकायों को कार्रवाई के निर्देश

नई दिल्ली, भोपाल, यशभारत। देशभर में बढ़ते अवैध निर्माण, रिहायशी भवनों के व्यावसायिक उपयोग और मास्टर प्लान उल्लंघनों पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अवैध निर्माणों पर केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सीलिंग और ध्वस्तीकरण जैसी कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि यदि किसी भवन को एक विशेष उद्देश्य के लिए अनुमति मिली हो और बाद में उसका उपयोग बदल दिया जाए, तो यह सिस्टम के साथ धोखाधड़ी है।

तमिलनाडु मामले की सुनवाई में देशभर की तस्वीर उजागर

20 मई को तमिलनाडु से जुड़े अवैध निर्माण और भूमि उपयोग उल्लंघन मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि यह समस्या किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है। देशभर में रिहायशी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां, अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण और स्वीकृत नक्शों से अलग निर्माण तेजी से बढ़ रहे हैं सुनवाई के दौरान न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) अजीत कुमार सिन्हा ने अदालत को बताया कि कई राज्यों ने केवल औपचारिक सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत की हैं, लेकिन यह नहीं बताया कि अवैध निर्माणों के खिलाफ वास्तविक कार्रवाई क्या हुई। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश,केवल सर्वे नहीं, जमीनी कार्रवाई जरूरी

अदालत ने कहा कि सिर्फ सर्वे रिपोर्ट देना पर्याप्त नहीं है। राज्यों को यह भी बताना होगा कि अवैध निर्माणों पर क्या कार्रवाई हुई और उसका जमीनी असर क्या दिखाई दिया।

नोटिस नहीं, सीलिंग और ध्वस्तीकरण

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फॉलो-अप एक्शन का अर्थ केवल नोटिस जारी करना नहीं है। इसमें सीलिंग और अवैध निर्माणों को ध्वस्त करना भी शामिल होगा।

बड़े अधिकारी देंगे शपथपत्र

संबंधित प्राधिकरण के चेयरमैन, सीईओ या आयुक्त स्वयं शपथपत्र दाखिल करेंगे और कार्रवाई की जानकारी देंगे।

लंबित मामलों का निपटारा 3 माह में

भवन नियम उल्लंघन और भूमि उपयोग परिवर्तन से जुड़े सभी लंबित मामलों का निपटारा तीन महीने के भीतर करने के निर्देश दिए गए हैं।

शिकायतों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त

अदालत ने न्याय मित्र अजीत कुमार सिन्हा को शिकायतों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया है।

राज्यों पर 50 हजार रुपए की कॉस्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अवैध निर्माण की समस्या पूरे देश में फैली हुई है। इसलिए प्रत्येक राज्य को 50 हजार रुपए कोर्ट रजिस्ट्री में जमा कराने होंगे।

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