दूषित पानी से लोगों की जिंदगी खतरे में, पनागर नगर पालिका की लापरवाही पर फूटा जनता का गुस्सा
अनेक शिकायतों के बाद भी मूकदर्शक बना रहा प्रशासन

दूषित पानी से लोगों की जिंदगी खतरे में, पनागर नगर पालिका की लापरवाही पर फूटा जनता का गुस्सा
पनागर, यशभारत। पनागर नगर पालिका प्रशासन की घोर लापरवाही, प्रशासनिक उदासीनता और तानाशाही रवैये के कारण आज जनजीवन सीधे नागरिकों के जीवन से खिलवाड़ करता नजर आ रहा है। एक तरफ सरकार स्वच्छ भारत और हर घर शुद्ध जल का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ इस वार्ड में लंबे समय से कचरा युक्त, बदबूदार और अत्यधिक दूषित पानी की सप्लाई की जा रही है। इस जहरीले पानी के सेवन से पूरे क्षेत्र में कभी भी कोई भयंकर महामारी पैर पसार सकती है, जिससे सैकड़ों निर्दोष जिंदगियां खतरे में पड़ सकती हैं।
अनेक शिकायतों के बाद भी मूकदर्शक बना रहा प्रशासन
स्थानीय नागरिकों नवल खमरिया, अजीत पटेल, चंदन पटेल, सुभाष तिवारी, रितेश जैन, पंचम सिंह, विनोद साहू और राकेश कोरी सहित सैकड़ों वार्डवासियों ने इस गंभीर समस्या को लेकर नगर पालिका कार्यालय के चक्कर काटे और अनेक बार लिखित शिकायतें सौंपीं, लेकिन एसी कमरों में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की संवेदनहीनता का आलम यह है कि आज तक इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया गया और जमीनी हालात जस के तस बने हुए हैं। जनता की जायज मांगों को हर बार ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
सीएम हेल्पलाइन पर भी सिर्फ खानापूर्ति, नहीं हुआ स्थायी समाधान
नगर पालिका की इस ढर्राई व्यवस्था और उपेक्षा से परेशान होकर जब वार्डवासियों ने सीएम हेल्पलाइन पर गुहार लगाई, तो वहां भी उनके साथ सिर्फ प्रशासनिक मजाक किया गया। शिकायत दर्ज होने के बाद नगर पालिका के लापरवाह कर्मचारी वार्ड में आते तो हैं, लेकिन केवल ऊपर-ऊपर से कचरा साफ करने की औपचारिकता निभाकर चले जाते हैं। दूषित जलापूर्ति के मुख्य तकनीकी कारण और पाइपलाइनों में आ रही गंदगी को दूर करने की जहमत आज तक किसी कर्मचारी या अधिकारी ने नहीं उठाई। सीएम हेल्पलाइन जैसी उच्च स्तरीय व्यवस्था को भी यहां का अमला ठेंगा दिखा रहा है।
क्या किसी मासूम की मौत के बाद जागेगा प्रशासन?
हाल ही में इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई दर्दनाक जनहानि और वीभत्स घटना के बाद भी पनागर नगर पालिका का अमला गहरी नींद में सोया हुआ है। इंदौर की उस भयावह घटना से सबक लेने के बजाय यहां का प्रशासन आंखें मूंद बैठा है। वार्डवासियों में इस निकम्मे और संवेदनहीन तंत्र के खिलाफ भारी आक्रोश और तीखा असंतोष व्याप्त है।
त्रस्त नागरिकों ने अब सीधे तौर पर यह तीखा सवाल पूछना शुरू कर दिया है कि क्या यह लापरवाह प्रशासन भी किसी मासूम की जान जाने, किसी घर का चिराग बुझने या इंदौर जैसी बड़ी महामारी और त्रासदी के होने का इंतजार कर रहा है? यदि समय रहते इस गंभीर समस्या का स्थायी निराकरण नहीं किया गया, तो आक्रोशित जनता सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।







