भोपालमध्य प्रदेश

अब स्कूलों में मिलेगी साइबर सुरक्षा की शिक्षा, 450 से ज्यादा स्कूलों में शुरू होगी विशेष क्लास

Cyber ​​security education will now be available in schools, with special classes starting in over 450 schools.

अब स्कूलों में मिलेगी साइबर सुरक्षा की शिक्षा, 450 से ज्यादा स्कूलों में शुरू होगी विशेष क्लास

भोपाल यश भारत। प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग बड़ा कदम उठाने जा रहा है। अब मध्यप्रदेश के हाई और हायर सेकंडरी स्कूलों में विद्यार्थियों को साइबर सिक्योरिटी की पढ़ाई कराई जाएगी। इसके लिए विभाग द्वारा विशेष पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है जिसे कक्षा 9वीं से 12वीं तक लागू किया जाएगा।

स्कूल शिक्षा विभाग और मप्र राज्य ओपन बोर्ड की मदद से तैयार हो रहे इस ड्राफ्ट के तहत विद्यार्थियों को डिजिटल सुरक्षा से जुड़े विषयों की जानकारी दी जाएगी। फिलहाल कुछ स्कूलों में केवल सेमिनार आयोजित किए जाते हैं लेकिन नई व्यवस्था में विद्यार्थियों को नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा। पहले चरण में प्रदेश के 450 से ज्यादा स्कूलों का चयन किया गया है जहां स्मार्ट टीवी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन स्कूलों में विशेष प्रशिक्षित इंस्ट्रक्टर नियुक्त किए जाएंगे। प्रशिक्षण से पहले इन्हें साइबर पुलिस द्वारा ट्रेनिंग भी दी जाएगी ताकि वे विद्यार्थियों को व्यवहारिक जानकारी दे सकें। पाठ्यक्रम में फेक ऐप्स की पहचान ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड यूपीआई ठगी से बचाव सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, सोशल मीडिया प्राइवेसी, फिशिंग लिंक और साइबर बुलिंग जैसे विषय शामिल किए जाएंगे। इसके अलावा स्कूलों में साइबर सेफ्टी क्लब और साइबर वॉरियर भी तैयार किए जाएंगे, जिससे विद्यार्थी खुद भी जागरूक बनें और दूसरों को भी सतर्क करें।

इस प्रशिक्षण के बाद विद्यार्थियों की साल में एक परीक्षा भी होगी। हालांकि इसके अंक मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं किए जाएंगे लेकिन सफल विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र दिया जाएगा। प्रदेश में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर समेत कई शहरों में पुलिस द्वारा सेफ क्लिक अभियान चलाया जा रहा है। अब इस अभियान को स्कूल स्तर तक ले जाने की तैयारी है। वर्तमान में एमपी बोर्ड के मॉडल स्कूलों में साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस प्रोग्राम संचालित हो रहा है। पिछले पांच वर्षों से यह कार्यक्रम नियमित रूप से चलाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर खासकर बच्चियां अधिक निशाने पर रहती हैं इसलिए बच्चों को समय रहते जागरूक करना जरूरी है।

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