न्यायालय ने राज्य सरकार, पंचायत राज निदेशालय एवं जिला पंचायत से माँगा उत्तर

जबलपुर । मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की माननीय न्यायमूर्ति श्रीमती मनिंदर भट्टी की एकलपीठ ने छिंदवाड़ा जिले के चार सेवानिवृत्त कर्मचारियों की रिट याचिका पर विचार करते हुए प्रदेश शासन के ग्रामीण विकास विभाग, पंचायत राज निदेशालय तथा जिला पंचायत छिंदवाड़ा को नोटिस जारी करते हुए उनका जवाब तलब किया है। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए निर्धारित अवधि के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता — राजेंद्र प्रसाद चौबे, राजेश कुमार पहाड़े, देव करण चरपे तथा स्वर्गीय उर्मिला सिंगारे के पति — मूलतः जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, छिंदवाड़ा के नियमित कर्मचारी थे, जिन्हें कालांतर में जिला पंचायत छिंदवाड़ा में समाहित कर लिया गया था।
याचिकाकर्ता राजेंद्र प्रसाद चौबे 28 फरवरी 2021 को सेवानिवृत्त हुए, किंतु आज तक उनकी ग्रेच्युटी और अवकाश संदाय (लीव एनकैशमेंट) की राशि अवमुक्त नहीं हुई है। इसी प्रकार देव करण चरपे एवं राजेश कुमार पहाड़े (31 मई 2025) के देयकों का भुगतान भी लंबित है। याचिका में यह तथ्य भी अंकित किया गया है कि एक याचिकाकर्ता के पति का देहांत हो चुका है, वहीं एक अन्य कर्मचारी भी अपनी बकाया राशि प्राप्त करने से पूर्व ही इस संसार से विदा हो गए।
याचिका के अनुसार, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने अनेकानेक पत्र लिखकर राज्य सरकार से सेवानिवृत्ति देयकों के भुगतानार्थ बजट आवंटित करने का अनुरोध किया, परंतु सेवानिवृत्ति के पाँच वर्ष बीत जाने पर भी राज्य सरकार ने बजट स्वीकृत नहीं किया।
अंततः 13 मार्च 2026 को पंचायत राज निदेशालय ने ₹74,98,75,617 (चौहत्तर करोड़ अट्ठानबे लाख पचहत्तर हज़ार छह सौ सत्रह) का बजट जारी किया, जिसमें डीआरडीए से समाहित कर्मचारियों के वेतन, भत्ते एवं सेवानिवृत्ति देयकों का संदाय भी सम्मिलित है। तथापि, आज तक मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत छिंदवाड़ा ने याचिकाकर्ताओं को भुगतान नहीं किया है। याचिका में इस आशंका को व्यक्त किया गया है कि बजट के लैप्स (समाप्त) हो जाने का भय है, जिससे याचिकाकर्ताओं को पुनः भटकना पड़ सकता है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता असीम त्रिवेदी, आनंद शुक्ला, विनीत टेहेनगुनिया, शुभम पाटकर तथा प्रशांत सिरमोलिया ने पैरवी की।







