राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा के सवाल पर रेल मंत्री का जवाब
रेल सुरक्षा में ऐतिहासिक सुधार-सकारात्मक परिणाम भी सामने आए

नई दिल्ली, यशभारत। संसद में पूछे गए एक अहम प्रश्न के जवाब में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दावा किया कि भारतीय रेल में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। राज्यसभा संासद विवेक तन्खा ने रेल मंत्री से पूछा था कि रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय तथा अवसंरचना विस्तार के बावजूद भारतीय रेल में सुरक्षा संबंधी चूक, अत्यधिक भीड़भाड़ और सेवा व्यवधान जारी रहने के क्या प्रमुख कारण हैं?, विगत तीन वर्षों के दौरान कितनी स्वतंत्र सुरक्षा संबंधी लेखापरीक्षाएँ (ऑडिट) कराई गई हैं? पटरियों के नवीनीकरण तथा सिग्नलिंग प्रणालियों के उन्नयन की वर्तमान स्थिति क्या है? बढ़ती निजी भागीदारी के परिप्रेक्ष्य में यात्री सुरक्षा, किफायती किराया तथा सेवा गुणवत्ता को किस प्रकार सुनिश्चित किया जाएगा?
इस पर सरकार के अनुसार, वर्ष 2014-15 में जहां 135 रेल दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं, वहीं 2025-26 (फरवरी 2026 तक) यह संख्या घटकर सिर्फ 14 रह गई है। यानी लगभग 90प्रतिशत की गिरावट। इसी तरह दुर्घटना सूचकांक भी 0.11 से घटकर 0.03 हो गया है, जो रेल संचालन में बड़े सुधार का संकेत है। रेल मंत्री ने बताया कि ट्रैक, सिग्नल सिस्टम, ओवरहेड उपकरण और रोलिंग स्टॉक का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है, जिससे सुरक्षा में लगातार सुधार हो रहा है।
हालांकि, सवाल अब भी बरकरार हैं—इतने बड़े निवेश के बावजूद ट्रेनों में भीड़भाड़, समय से देरी और सेवा में व्यवधान क्यों जारी हैं? साथ ही, बढ़ती निजी भागीदारी के बीच सस्ती और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
कुल मिलाकर, सुरक्षा के आंकड़े बेहतर जरूर हुए हैं, लेकिन यात्रियों की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान अभी बाकी है।
फिलहाल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के किसी नए विलय या समेकन का कोई प्रस्ताव नहीं
राज्य सभा सांसद विवेक के. तन्खा ने सरकार से पूछा कि क्या बैंकों के अगले चरण के विलय की कोई योजना है? विलय का आधार क्या है और जमाकर्ताओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा रही है? बैंक कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं
इस पर वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया- फिलहाल सरकार के पास सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के किसी नए विलय या समेकन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
इसका मतलब क्या हुआ?
अभी के समय में कोई नया बैंक मर्जर प्लान नहीं है सरकार ने यह स्पष्ट किया कि न तो अगले चरण की कोई योजना बनाई जा रही हैन ही इस विषय पर कोई प्रस्ताव फिलहाल विचार में है







