डिग्री पूरी, नौकरी भी मिली… फिर भी हॉस्टल नहीं छोड़ रहीं छात्राएं
नौकरी के बावजूद हॉस्टल में रहना जारी

डिग्री पूरी, नौकरी भी मिली… फिर भी हॉस्टल नहीं छोड़ रहीं छात्राएं
जबलपुर ,यश भारत। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के छात्रावासों में अवैध रूप से रहने का मामला एक बार फिर सामने आया है। कस्तूरबा बाई गर्ल्स हॉस्टल में करीब एक दशक से कुछ छात्राओं के नियम विरुद्ध रहने की जानकारी सामने आई है, जिस पर विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में है।
सूत्रों के मुताबिक हॉस्टल में रहने वाली करीब एक दर्जन छात्राएं वर्षों पहले अपनी मास्टर डिग्री पूरी कर चुकी हैं, लेकिन अब तक कमरे खाली नहीं किए हैं। इसके कारण दूर-दराज से पढ़ाई के लिए आने वाली नई छात्राओं को हॉस्टल में कमरा नहीं मिल पा रहा है।
नौकरी के बावजूद हॉस्टल में रहना जारी
बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ युवतियां विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में नौकरी भी कर रही हैं। नियमों के अनुसार हॉस्टल की सुविधा केवल अध्ययनरत छात्राओं के लिए होती है, इसके बावजूद वे हॉस्टल में रह रही हैं।
कम शुल्क बना वजह
हॉस्टल का सालाना शुल्क लगभग पांच हजार रुपये है, जबकि शहर में किराये का कमरा लेने पर हर महीने इतना खर्च हो सकता है। यही कारण है कि कई छात्राएं हॉस्टल छोड़ने से बच रही हैं।
नई छात्राएं हो रहीं परेशान
कमरों की कमी के कारण दूर-दराज से आने वाली कई छात्राओं को मजबूरन निजी हॉस्टल या किराये के कमरों में रहना पड़ रहा है, जहां उन्हें हर महीने पांच से सात हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं







