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सेना ने देशभर में 246 सड़कों और सैन्य प्रतिष्ठानों के नाम बदले

भारतीय सेना में औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति की दिशा में बड़ा कदम

सेना ने देशभर में 246 सड़कों और सैन्य प्रतिष्ठानों के नाम बदले

भारतीय सेना में औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति की दिशा में बड़ा कदम

नई दिल्ली,यश भारत भारतीय सेना ने ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रभाव के अवशेषों को समाप्त करने और देश की समृद्ध सैन्य परंपरा को सशक्त रूप से स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए देशभर में अपने प्रतिष्ठानों में स्थित 246 सड़कों, इमारतों, आवासीय कॉलोनियों और अन्य सुविधाओं के नाम बदलने की प्रक्रिया पूरी कर ली है।

इस नामकरण अभियान के तहत 124 सड़कों, 77 आवासीय कॉलोनियों, 27 इमारतों व अन्य सैन्य सुविधाओं और 18 अन्य स्थलों—जिनमें पार्क, प्रशिक्षण क्षेत्र, खेल मैदान, प्रवेश द्वार और हेलिपैड शामिल हैं—का नाम बदला गया है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, नए नाम वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों, युद्ध नायकों और विभिन्न सैन्य अभियानों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले सेनानायकों के सम्मान में रखे गए हैं। इसका उद्देश्य सैनिकों और उनके परिवारों के दैनिक जीवन, प्रशिक्षण और सेवा स्थलों में राष्ट्रभाव, साहस, बलिदान और नेतृत्व के मूल्यों को आत्मसात कराना है।

यह निर्णय वर्ष 2022 में शुरू की गई एक व्यापक समीक्षा का परिणाम है, जिसकी प्रेरणा मार्च 2021 में गुजरात के केवड़िया में आयोजित संयुक्त कमांडरों के सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन से मिली थी। प्रधानमंत्री ने उस दौरान सशस्त्र बलों से औपनिवेशिक दौर की पुरानी परंपराओं को समाप्त कर प्रक्रियाओं, रीति-रिवाजों और प्रतीकों के स्वदेशीकरण पर जोर दिया था।

सेना में यह नामकरण अभियान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 2022 में प्रस्तुत ‘पंच प्रण’ के अनुरूप भी है, जिनका उद्देश्य वर्ष 2047 में भारत की आज़ादी के 100 वर्ष पूरे होने तक औपनिवेशिक मानसिकता को जड़ से खत्म करना है। यह पहल अन्य डी-कोलोनाइजेशन कदमों के साथ भी जुड़ी हुई है, जैसे 2022 में आईएनएस विक्रांत के लिए नया नौसैनिक ध्वज जारी करना, जो छत्रपति शिवाजी महाराज की मुहर से प्रेरित है और जिसमें सेंट जॉर्ज क्रॉस को हटाया गया है।

भारतीय सेना का यह कदम न केवल ऐतिहासिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सैनिकों में स्वाभिमान और राष्ट्रीय चेतना को और अधिक मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

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