राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा के सवाल पर केंद्र सरकार का स्पष्ट जबाव,महाकौशल में एम्स फिलहाल नहीं

जबलपुर। महाकौशल क्षेत्र, खासकर जबलपुर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्थापना को लेकर चल रही मांग पर केंद्र सरकार ने संसद में स्थिति साफ कर दी है। राज्यसभा में सांसद विवेक तन्खा के सवाल के जवाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि फिलहाल इस क्षेत्र में नए एम्स की स्थापना का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
सांसद विवेक तन्खा ने सदन में महाकौशल के आदिवासी और पिछड़े जिलों की स्वास्थ्य चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि डॉक्टरों और विशेषज्ञ सेवाओं की भारी कमी है। उन्होंने तर्क दिया कि भोपाल में एम्स होने के बावजूद महाकौशल की बड़ी आबादी और दूरदराज़ इलाकों को देखते हुए जबलपुर में अलग एम्स की आवश्यकता महसूस की जा रही है। तन्खा ने यह भी कहा कि इलाज की सुविधाएं न होने से गरीब और ग्रामीण मरीजों को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है।
केंद्र का जवाब: नया एम्स नहीं, मौजूदा संस्थानों को मजबूत करने पर जोर
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने जवाब में कहा कि प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत देश में 22 एम्स स्वीकृत किए गए हैं और मध्य प्रदेश के लिए भोपाल एम्स पहले से ही कार्यरत है। इसी कारण राज्य में नए एम्स की फिलहाल कोई योजना नहीं है। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि महाकौशल में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर लगातार काम किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जबलपुर स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज का उन्नयन किया गया है, जहां 206 बिस्तरों वाला सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक तैयार किया गया है। इसमें न्यूरोसर्जरी, कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और न्यूरोलॉजी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे क्षेत्रीय मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके।
महाकौशल में स्वास्थ्य ढांचे को मिल रही मजबूती
सरकार ने संसद को यह भी जानकारी दी कि महाकौशल क्षेत्र के अन्य जिलों में चिकित्सा शिक्षा और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ किया जा रहा है। छिंदवाड़ा में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज की स्थापना और मंडला में नए मेडिकल कॉलेज की मंजूरी इसी प्रयास का हिस्सा है। साथ ही जबलपुर और छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और स्नातकोत्तर सीटों की संख्या बढ़ाई गई है।
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के तहत जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला और डिंडोरी में 50-50 बिस्तरों वाले क्रिटिकल केयर ब्लॉक स्वीकृत किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं से महाकौशल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में उल्लेखनीय सुधार होगा।







