अहिल्या घाट, महेश्वर में तीन दिवसीय निमाड़ उत्सव का समापन

अहिल्या घाट, महेश्वर में तीन दिवसीय निमाड़ उत्सव का समापन
भोपाल यशभारत। जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी एवं जिला प्रशासन खरगोन के सहयोग से अहिल्या घाट, महेश्वर में तीन दिवसीय निमाड़ उत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें तीसरे और समापन दिवस उत्सव की शुरुआत लाइट एंड साउंड से की गई। शुरुआत गौरी देशमुख एवं साथी, खरगोन द्वारा नर्मदाष्टकम् और श्रीकृष्ण कथक नृत्य से की गई। प्रस्तुति के माध्यम से भक्ति, नृत्य, संगीत, कथा और अनुभूति से लेकर आध्यात्मिकता तक की एक निरंतर यात्रा को दिखाया गया। इसके पश्चात गान-समूह की मधुर स्वर लहरियों के साथ नर्मदा अष्टकम की प्रस्तुति दी गई। जहां मां नर्मदा की महिमा को शब्द, सुर और ताल से नमन किया। संगीत सहयोग में तबले पर सुधाकर शिंदे , बांसुरी पर अखिलेश राव , की-बोर्ड पर राहुल राठौर और ऑक्टोपैड पर दिवेश उपस्थित रहे। रामदास साकल्ले एवं साथी, खंडवा द्वारा काठी नृत्य प्रस्तुति दी गई। काठी मध्यप्रदेश के निमाड़ का एक प्रसिद्ध लोकनृत्य-नाट्य है। पार्वती की तपस्या से सम्बन्धित काठी मातृपूजा का त्यौहार है।
कार्यक्रम में अनुजा जोशी एवं साथी, खंडवा द्वारा गणगौर नृत्य की प्रस्तुति दी गई। गणगौर निमाड़ी जन-जीवन का गीति काव्य है। चैत्र दशमी से चैत्र सुदी तृतीया तक पूरे नौ दिनों तक चलने वाले इस गणगौर उत्सव का ऐसा एक भी कार्य नहीं, जो बिना गीत के हो। गणगौर के रथ सजाये जाते हैं, रथ दौड़ाए जाते हैं। इसी अवसर पर गणगौर नृत्य भी किया जाता है। झालरिया दिये जाते हैं। महिला और पुरूष रनुबाई और धणियर सूर्यदेव के रथों को सिर पर रखकर नाचते हैं। तीन दिवसीय उत्सव में जिला प्रशासन की ओर से प्रति दिवस विभिन्न प्रतियोगिता का आयोजन की गया। उत्सव में अगले क्रम में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन हुआ।







