रेलवे की शान पर सवार सन्नाटा, विसटाडोम में गिने-चुने यात्री
शुरुआत में रहा ठीक फिर हो गई हालत गंभीर

जबलपुर यशभारत।जबलपुर से चलकर भोपाल जाने वाली जनशताब्दी एक्सप्रेस का विस्टाडोम 35 सीटर है जिसमें जबलपुर से आधा दर्जन यात्री सफर कर रहे हैं। इस तरह से लाखों रुपए खर्च कर यात्रियों को पर्यटन और आधुनिक सफर का नया अनुभव देने के लिए जनशताब्दी एक्सप्रेस में लगाया गया विसटाडोम कोच अब खाली जा रहा है। नज़ारों के मज़े और पारदर्शी छत जैसी आधुनिक सुविधाओं के बावजूद यात्री नहीं मिल रहे, जिससे रेलवे की महत्वाकांक्षी योजना पर सवाल खड़े हो गए हैं। उल्लेखनीय है कि पर्यटन को बढ़ावा देने और यात्रियों को नया अनुभव देने के लिए जनशताब्दी एक्सप्रेस में लगाया गया विसटाडोम कोच अब रेलवे के लिए सिरदर्द साबित हो रहा है। लाखों रुपए खर्च कर तैयार किए गए इस आधुनिक कोच की सीटें लगातार खाली जा रही हैं। कई बार पूरा डिब्बा बिना यात्रियों के ही सफर करता है।
खाली जा रही सीटें
विसटाडोम की शुरुआत में रेलवे को उम्मीद थी कि पारदर्शी छत और बड़े शीशों से नजारे देखने वाले इस कोच को लोग खूब पसंद करेंगे। लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश दिनों में सीटें बुक ही नहीं होतीं।
यात्रियों की बेरुखी
यात्रियों का कहना है कि किराया ज्यादा और यात्रा छोटी होने की वजह से लोग इस कोच में सफर करने से बच रहे हैं।
भविष्य पर सवाल
फिलहाल यात्रियों की बेरुखी के चलते यह सवाल खड़ा हो गया है कि यदि हालात नहीं बदले तो क्या रेलवे को विसटाडोम बंद करना पड़ेगा?
यह हैं विस्टाडोम कोच की विशेषताएँ
विस्टाडोम कोच में एक बड़ी कांच की छत और कांच की खिड़कियाँ हैं, जो यात्रियों को बाहरी दृश्यों का विस्तृत और स्पष्ट नज़ारा प्रदान करती हैं.इन कोचों में घूमने वाली सीटें और वातानुकूलन जैसी आधुनिक अन्य सुविधाएँ भी होती हैं, जो आरामदायक और यादगार यात्रा अनुभव सुनिश्चित करती हैं।बावजूद इसके पर्याप्त यात्री न मिलने के कारण रेलवे को भी काफी घाटा लग रहा है। बता दें कि विस्टाडोम कोच अक्सर उन रूट पर चलाए जाते हैं, जहां पहाड़, नदियां, झरनें व हरे-भरे घास के मैदान जैसे सुंदर प्राकृतिक नजारें देखने को मिलते हैं। इन रूट पर यात्रियों को शानदार अनुभव प्रदान करने के लिए इन विस्टाडोम कोच का प्रयोग किया जाता है।






