MP में डकैतों का खात्मा, फिर भी 922 FIR: पुराने कानून पर उठे सवाल, राज्यसभा सांसद एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, कानून समाप्त करने का किया आग्रह

यश भारत : मध्य प्रदेश में डकैतों का सफाया हो चुका है, लेकिन एक पुराना और सख्त कानून अभी भी लोगों को परेशान कर रहा है। बीते तीन सालों में इस कानून के तहत 922 एफआईआर दर्ज की गई हैं। अब इस कानून को खत्म करने की मांग जोर पकड़ रही है।

राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को चिट्ठी लिखकर इस कानून को समाप्त करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि जब अपराध और अपराधी ही नहीं हैं, तो इस कानून की क्या जरूरत है। इससे पहले भिंड विधायक मेवाराम जाटव भी विधानसभा में यह मुद्दा उठा चुके हैं।

1981 का वो दौर
यह कानून, जिसे ‘मध्यप्रदेश डकैती और व्यापार प्रभाव क्षेत्र अधिनियम (MPDAA)’ कहते हैं, 1981 में बनाया गया था। उस समय ग्वालियर-चंबल में डकैतों का आतंक था और इस कानून ने अपराध रोकने में मदद की थी। लेकिन, सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, 2007 के बाद से कोई नया डकैत सामने नहीं आया है और आज प्रदेश में कोई डकैत गैंग सक्रिय नहीं है।
संविधान विरोधी है यह कानून?
सांसद तन्खा का कहना है कि यह कानून अब संविधान के खिलाफ है। खासकर यह समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) और व्यक्तिगत स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन करता है। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इसका इस्तेमाल खास समुदायों को निशाना बनाने के लिए हो रहा है, जिससे सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंच रहा है।
सांसद तन्खा ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे इस अप्रासंगिक कानून को खत्म कर लोकतंत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को साबित करें। अब देखना यह होगा कि सरकार इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाती है।







