सायबर स्लेवरी में फसे युवाओं के अंगों की हो रही तस्करी -सायबर गैंग के चंगुल से मुक्त हुए छह युवकों ने सुनाई दर्दभरी दांस्ता,

सायबर स्लेवरी में फसे युवाओं के अंगों की हो रही तस्करी
-सायबर गैंग के चंगुल से मुक्त हुए छह युवकों ने सुनाई दर्दभरी दांस्ता,
– स्टेट सायबर सेल कर रही पूरे मामले की पड़ताल
सतीश उपाध्याय, भोपाल। देशभर में चल रहीं डिजिटल अरेस्ट और सायबर फ्राड की वारदातों के पीछे एक संगीन और चौकाने वाला मामला सामने आया है। बेरोजगारी और ज्यादा पैसा कमाने के लालच में सायबर गैंग के झांसे में आकर प्रदेश ही नहीं देशभर के युवा सायबर स्लेवरी का शिकार हो रहे हैं। सायबर गैंग द्वारा बंधक बनाए गए युवाओं के साथ बर्बरता पूर्ण व्यवहार कर उनके अंगों को निकाल कर देश-विदेश में बेचा जा रहा है। यह चौकाने वाला खुलासा साउथ एशियाई देशों में सायबर गैंग के चंगुल से मुक्त होकर मध्य प्रदेश लौटे युवाओं ने स्टेट सायबर सेल के अधिकारियों के सामने किया है। जिसके बाद पुलिस प्रदेश भर से साउथ एशियाई देशों में नौकरी करने गए युवाओं की जानकारी जुटाने में लग गई है। पुलिस इस बात का भी पता लगा रही है कि प्रदेश के कितने युवा सायबर स्लेवरी का शिकार हुए हैं और कहीं उनके अंगों को निकाल कर बेचा तो नहीं गया है। हालांकि अब तक पुलिस के सामने प्रदेश में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। साउथ एशियाई देश म्यांमार, कंबोडिया थाईलेंड और लाओस से डिजिटल अरेस्ट और सायबर फ्रांड की वारदातों को अंजाम देने के लिए हाईटेक कॉल सेंटर संचालित हैं। जहां पर दुनिया भर से बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर सायबर गैंग म्यांमार, कंबोडिया, थाईलेंड और लाओस बुलाया जा रहा है। यहां पर युवाओं को ट्रेनिंग देकर सायबर फ्रांड के लिए तैयार किया जाता है। इसके बाद नौकरी के नाम पर टॉरगेट देकर लोगों को लूटने को कहा जाता है। इस दौरान सायबर गैंग सभी युवाओं को इन देशों की बार्डर पर सायबर स्लेवरी (गुलाम) बना लेती है। छह साइबर स्लेवरी वापस पहुंचे- स्टेट सायबर सेल के सामने मध्य प्रदेश से साउथ एशियाई देशों में नौकरी के लालच में पहुंचकर सायबर स्लेवरी का शिकार हुए छह युवक वापस अपने-अपने घर पहुंचे हैं। इनमें इंदौर के दो युवकों के अलावा ग्वालियर, शिवपुरी और राजगढ़ के युवक शामिल हैं। इनमें एक युवक पूर्व में कॉल सेंटर पर काम करता था, जो नौकरी के लालच में विदेश पहुंच गया। जहां पर सायबर ठगों ने उसे स्लेवरी बना लिया। इसके अलावा एक युवक ठेला लगाता था, जो सायबर ठगों के चंगुल में फस गया। सायबर ठगी का टॉरगेट पूरा न होने पर इन दोनों युवकों के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। इन युवकों के साथ अन्य चार युवक टॉरगेट पूरा न कर पाने के बाद किसी तरह मारपीट व अन्य यातनाओं से बचते रहे और बाद में सायबर गैंग के चंगुल से छुट कर 1 से 31 दिसंबर 2024 के बीच मध्य प्रदेश लौटे। सायबर स्लेवरी के अंगों को निकल रही सायबर गैंग- इन छह युवकों ने साउथ ऐशियाई देशों में हो रही सायबर स्लेवरी की डरावनी और दिल दहला देने वाली दास्तां सुनाई। इन युवकों ने बताया कि टॉरगेट पूरा न होने पर मारपीट की जाती थी। इसके अलावा जो नुकसान की भरपाई नहीं कर पाते हैं, उनके अंगों को निकाल कर बेच दिया जाता है। सायबर गैंग के ठिगानों पर यह बात आम है। 950 लोगों की जानकारी मिली- स्टेट सायबर सेल को अब तक इन देशों में अच्छी नौकरी के लिए पहुंचे ऐसे 950 लोगों की जानकारी मिली है। जो पिछले कुछ सालों में वापस मध्य प्रदेश लौट कर आए हैं। अब पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि ये लोग कहां काम करते थे और किसके माध्यम से विदेश पहुंचे। इनमें से कितने लोग सायबर स्लेवरी का शिकार हुए हैं और कहीं किसी के अंगों को निकाला तो नहीं गया है। वहीं वर्तमान में मप्र के कितने युवा इन देशों में रह रहे हैं। क्या है साइबर स्लेवरी? साइबर स्लेवरी (बंधक गुलाम) एक आधुनिक तरीके के गुलामी है, जिसमें लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर अपराध या डिजिटल अरेस्ट में फंसाया जाता है। इसमें पीडि़तों को लुभावनी नौकरियों का लालच दिया जाता है, लेकिन बाद में उन्हें इंटरनेट स्कैम, डेटा चोरी, ऑनलाइन ठगी या जबरन अश्लील कंटेंट बनाने जैसे अपराध करने के लिए मजबूर किया जाता है। कैसे काम करता है साइबर स्लेवरी अच्छी नौकरी और ज्यादा पैसा कमाने का झांसा देकर विदेश में नौकरी के झूठे ऑफर दिए जाते हैं। बेरोजगार युवाओं को विदेश बुलाकर उनके पासपोर्ट और दस्तावेज छीन कर रख लिए जाते हैं। इसके बाद उन्हें साइबर ठगी, ऑनलाइन धोखाधड़ी या अश्लील सामग्री फैलाने के लिए मजबूर किया जाता है। इसके साथ भागने की कोशिश करने पर मारपीट या हत्या करने की धमकी दी जाती है। कौन होते है इसका शिकार बेरोजगार युवा, जिन्हें साउथ एशियाई देशों में नौकरी का लालच दिया जाता है। वे अक्सर इन अपराधियों के लुभावनी बातों में आ जाते है। इसके अलावा, कम पढ़े-लिखे लोग, जिन्हें डिजिटल धोखाधड़ी की जानकारी नहीं होती, वे भी इसके शिकार हो जाते हैं। वर्तमान समय में ऑनलाइन गेमिंग या सोशल मीडिया के जरिए ठगे जाने वाले लोग इनका शिकार होते हैं। कैसे बचें साइबर स्लेवरी से एसपी सायबर सेल भोपाल प्रणाव एस नागवंशी ने बताया कि अगर कोई आपको डिजिटल तरीके से अच्छे पैकेज पर नौकरी का ऑफर्स दे रहा तो सतर्क हो जाएं, खासकर अगर वे विदेश (साउथ ऐशियाई देश) जाने के लिए जल्दबाजी करने को कहे। सोशल मीडिया और जॉब पोर्टल्स पर शेयर की गई जानकारी को सावधानी से दें। विदेश यात्रा से पहले कंपनी की पूरी जांच करें और एंबेसी से पुष्टि करें। अगर फंस जाएं, तो तुरंत भारतीय दूतावास, साइबर क्राइम सेल या परिवार से संपर्क करें।






