36 महीने, अनगिनत अर्जियां… पर अब भी झोपड़ी के आसरे टिका मासूमों का भविष्य! : जर्जर स्कूल भवन के चलते झोपड़ी में पढऩे को मजबूर ग्रामीण बच्चे

मंडला| जिले के घुघरी विकासखंड की ग्राम पंचायत सिंघनपुरी के खेरमाई मोहल्ला में संचालित प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर जिम्मेदारों की निष्क्रियता और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को उजागर कर रही है। स्कूल भवन जर्जर होने के कारण पिछले करीब तीन वर्षों से बच्चों को निजी मकान/झोपड़ी में पढ़ाया जा रहा है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए ग्राम पंचायत, पालक शिक्षक संघ एवं जनसामान्य से चर्चा के बाद विद्यालय को अस्थायी रूप से निजी भवन में संचालित किया जा रहा है। स्थिति यह है कि एक छोटे से कमरे में कक्षा पहली से लेकर पांचवीं तक के बच्चों की कक्षाएं संचालित हो रही हैं। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्चों को पढ़ाई के लिए किस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा होगा।
बताया गया कि इस संबंध में जब बीआरसी अधिकारी से जानकारी ली गई, तो उन्होंने बताया कि स्कूल भवन की स्थिति अत्यधिक जर्जर होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निजी व्यवस्था में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तीन वर्ष का लंबा समय बीत जाने के बावजूद विद्यालय के लिए स्थायी भवन की व्यवस्था नहीं हो पाना गंभीर चिंता का विषय है। एक ओर शासन द्वारा बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर खेरमाई मोहल्ला के बच्चे झोपड़ीनुमा भवन में पढऩे को मजबूर हैं। समानता और शिक्षा के अधिकार की बात करने वाले समाज में बच्चों के साथ यह स्थिति व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। ग्रामीणों और पालकों ने जिम्मेदार विभाग से मांग की है कि बच्चों की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए विद्यालय के लिए शीघ्र नवीन एवं सुरक्षित भवन की व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।






