सरकारी दावों की उतरी ‘गैस’, आंकड़ों की बाजीगरी के बीच खाली पड़े हैं जनता के चूल्हे! : गैस की भीषण किल्लत: 15 दिन बाद भी नहीं मिल रहा सिलेंडर

सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ प्रदेश सरकार और तेल कंपनियां बड़े-बड़े विज्ञापनों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए दावा कर रही हैं कि प्रदेश में गैस की कोई कमी नहीं है। आंकड़ों की बाजीगरी ऐसी कि हर रोज 2.20 लाख सिलेंडर सप्लाई होने की बात कही जा रही है। लेकिन सागर की जमीनी हकीकत इन ‘किताबी दावों’ की हवा निकाल रही है। शहर में घरेलू उपभोक्ता बुकिंग के 10 से 15 दिन बाद भी सिलेंडर के लिए दर-दर भटक रहे हैं। सवाल यह उठता है कि अगर सप्लाई भरपूर है, तो क्या गैस एजेंसियां सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग कर रही हैं?
सीएम हेल्पलाइन भी बेअसर, उपभोक्ता लाचार
प्रशासनिक दावों की पोल खोलने के लिए एक उपभोक्ता (क्रमांक- 632896) का उदाहरण ही काफी है। उपभोक्ता ने बताया कि उन्होंने 26 मार्च को एचपी गैस के लिए सिविल लाईंस की एक गैस एजेंसी में ऑनलाइन सिलेंडर बुक किया था। 2 अप्रैल तक सिलेंडर न मिलने पर जब उन्होंने सीएम हेल्पलाइन पर गुहार लगाई, तो उम्मीद थी कि राहत मिलेगी। लेकिन आज 7 अप्रैल हो जाने के बावजूद सिलेंडर का कहीं पता नहीं है। यह स्थिति दर्शाती है कि गैस एजेंसियों की मनमानी के आगे मुख्यमंत्री कार्यालय भी असहाय नजर आ रहा है।
क्या कागजों पर ही दौड़ रहे हैं सिलेंडर?
हाल ही में भोपाल में हुई प्रेस वार्ता में अधिकारियों ने कहा था कि 13 बॉटलिंग प्लांट में पर्याप्त स्टॉक है और घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन सागर के उपभोक्ताओं का अनुभव इसके ठीक उलट है। सरकारी स्तर पर दावा किया जा रहा है कि 95% बुकिंग ऑनलाइन हो रही है और पारदर्शी तरीके से डिलीवरी दी जा रही है। लेकिन बुकिंग के हफ्तों बाद भी डिलीवरी वैन का इंतजार खत्म नहीं होना सरकारी दावों की हकीकत बयान कर रहा है। ऐसे में यह बड़ा सवाल उठता है कि आखिर वो 2.20 लाख सिलेंडर जा कहाँ रहे हैं? क्या इन्हें जानबूझकर कृत्रिम अभाव पैदा करने के लिए रोका जा रहा है या फिर ऊंचे दामों पर व्यावसायिक क्षेत्रों में खपाया जा रहा है?
जनता की परेशानी से बेखबर प्रशासन
अधिकारी ‘सब चंगा सी’ का राग अलाप रहे हैं, जबकि आम आदमी सुबह से शाम तक गैस एजेंसी के चक्कर काट रहा है। यदि जल्द ही इस किल्लत और वितरण प्रणाली की धांधली पर लगाम नहीं कसी गई, तो जनता का आक्रोश सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा। फिलहाल तो सरकार के तमाम दावे खोखले साबित हो रहे हैं और आम उपभोक्ता गैस की किल्लत की आग में झुलस रहा है।







