
‘राहगीरी डे’ बना फिटनेस, स्वच्छता और सकारात्मक ऊर्जा का जीवंत उत्सव
योगा, जुंबा और खेल गतिविधियों में उमड़ा जनसैलाब; नागरिकों ने माना—ऐसी पहल से बदलेगी शहर की जीवनशैली
कटनी, यशभारत। जागृति पार्क आज रविवार की सुबह कुछ अलग ही नजारा पेश कर रहा था। जैसे ही सूरज की पहली किरणें पार्क की हरियाली पर पड़ीं, वैसे ही धीरे-धीरे लोगों की चहल-पहल बढ़ने लगी। कुछ ही देर में पूरा परिसर तालियों की गूंज, बच्चों की हंसी और संगीत की धुनों से जीवंत हो उठा। मंच के एक ओर योगा मैट पर नागरिक गहरी सांसों के साथ योगाभ्यास कर रहे थे, तो दूसरी ओर ज़ुम्बा की तेज़ धुनों पर पूरा समूह झूमता नजर आ रहा था। बच्चों की बोरा दौड़ और म्यूजिकल चेयर में उत्साह देखते ही बन रहा था, वहीं रस्साकशी में लोग पूरी ताकत झोंककर टीम भावना का परिचय दे रहे थे।
कार्यक्रम में हर चेहरा मुस्कुराता दिखा—बुजुर्ग भी बच्चों के साथ खेलों में शामिल होकर अपने बचपन को याद करते नजर आए। पूरा वातावरण किसी औपचारिक कार्यक्रम जैसा नहीं, बल्कि एक खुले परिवारिक उत्सव जैसा महसूस हो रहा था।
इसी बीच नगर निगम आयुक्त तपस्या परिहार भी कार्यक्रम में पहुँची, उन्होंने न केवल विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया, बल्कि प्रतिभागियों से सीधे संवाद भी किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने बेहद सहज और प्रेरक शब्दों में कहा कि “आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अगर हम अपने लिए थोड़ा समय निकाल लें, तो स्वास्थ्य और स्वच्छता दोनों को बेहतर बनाया जा सकता है। राहगीरी डे इसी सोच का विस्तार है—जहां शहर खुद अपने नागरिकों के साथ चलना सीखता है।”
उन्होंने आगे कहा कि स्वच्छता केवल अभियान नहीं, बल्कि आदत होनी चाहिए और फिटनेस केवल विकल्प नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान कई परिचित चेहरे भी नजर आए—समाजसेवी निरंजन पंजवानी, मौसूफ़ अहमद बिट्टू,रमेश सोनी, सुभाष शिब्बू साहू, गोविंद चावला, स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर नीलम जगवानी, निशा तिवारी, जागृति पार्क के सचिव निरंजन पंजवानी सहित बड़ी संख्या में नागरिक, स्वयंसेवक और नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। उपायुक्त शैलेश गुप्ता, कार्यपालन यंत्री अंशुमान सिंह, राजस्व अधिकारी जागेश्वर पाठक, सहायक यंत्री अनिल जायसवाल, उपयंत्री पवन श्रीवास्तव, जयेंद्र प्रताप सिंह, शैलेन्द्र प्यासी, मृदुल श्रीवास्तव, मोना करेरा, स्वास्थ्य अधिकारी संजय सोनी, राजस्व निरीक्षक मुकेश राजपूत, विनोद पांडे, आलोक तिवारी,अमित सोनी भी पूरे आयोजन में सक्रिय नजर आए।
करीब दो घंटे तक जागृति पार्क का हर कोना जीवंत बना रहा। कहीं योग की शांति थी, कहीं जुंबा की ऊर्जा, तो कहीं बच्चों की खिलखिलाहट। लौटते हुए कई लोगों के चेहरों पर एक ही बात साफ दिख रही थी—यह सिर्फ कार्यक्रम नहीं, बल्कि शहर की नई जीवनशैली की शुरुआत थी।






