मिक्स कचरा मिलने पर कुबेर डेयरी पर 10 हजार का जुर्माना , पांच मीट दुकानों से 62 हजार वसूले

मिक्स कचरा मिलने पर कुबेर डेयरी पर 10 हजार का जुर्माना , पांच मीट दुकानों से 62 हजार वसूले
भोपाल, यश भारत । शहर में स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 का पालन कराने के लिए नगर निगम ने संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई तेज कर दी है। निगम की कार्रवाई का असर अब दिखाई देने लगा है। शिवाजी नगर स्थित शासकीय जयप्रकाश चिकित्सालय ने बल्क वेस्ट जनरेटर के रूप में पंजीयन कराया है। अस्पताल प्रबंधन ने इसके लिए 2700 रुपये शुल्क भी जमा किया है। वहीं, दूसरी ओर नियमों का पालन नहीं करने वाले खाद्य प्रतिष्ठानों पर जुर्माना लगाया गया।
निगम आयुक्त संस्कृति जैन के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत अधिकारियों ने हाल ही में जयप्रकाश चिकित्सालय का निरीक्षण किया था। इस दौरान बायोमेडिकल वेस्ट अन्य कचरे के साथ मिला हुआ पाया गया था। मामले में अस्पताल की हाउसकीपिंग एजेंसी सेडमेप के खिलाफ चालानी कार्रवाई की गई। साथ ही अस्पताल के अधीक्षक और कर्मचारियों को अलग-अलग प्रकार के कचरे के पृथक्करण और उसके उचित निष्पादन की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने अस्पताल प्रबंधन को बल्क वेस्ट जनरेटर के रूप में पंजीयन कराने के लिए भी कहा था। इसके बाद अस्पताल ने बुधवार को पंजीयन पूरा कर शुल्क जमा किया।
अब अस्पताल से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र किया जाएगा। इसके लिए निगम द्वारा निर्धारित शुल्क लिया जाएगा। निगम ने बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में आने वाले सरकारी, निजी और अन्य बड़े परिसरों के प्रबंधकों से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल पर पंजीयन कराने की अपील की है।
इधर, जोन क्रमांक 13 के वार्ड 55 में निगम अमले ने कुबेर डेयरी का निरीक्षण किया। यहां गीला-सूखा कचरा और खाद्य सामग्री मिश्रित अवस्था में मिली। खास बात यह है कि इससे पहले भी डेयरी संचालक को कचरा अलग-अलग रखने की हिदायत देते हुए 500 रुपये का स्पॉट फाइन किया जा चुका था। दोबारा नियमों का उल्लंघन मिलने पर इस बार 10 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया।
जोन क्रमांक 10 में चिकन और मटन विक्रय प्रतिष्ठानों की जांच के दौरान पांच दुकानों पर भी कार्रवाई की गई। गरीब नवाज चिकन शॉप, मालवा चिकन शॉप, अल्ताफ चिकन शॉप, गरीब नवाज मटन शॉप और चिकनेट मीट शॉप में गंदगी तथा लाइसेंस की शर्तों के अनुरूप व्यवस्थाएं नहीं मिलने पर संचालकों से कुल 62 हजार रुपये स्पॉट फाइन के रूप में वसूले गए।







