मां नर्मदा मंदिर में गुरु पूर्णिमा पर भक्तों की उमड़ी भीड़ : गुरु की भक्ति भाव से पूजन अर्चन कर भक्तों ने लिया आशीर्वाद

नरसिंहपुर,गोटेगांव lविगतदिवस स्थानीय पटेलवार्ड स्थित जगत जननी मां नर्मदाजी के मंदिर में गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व भक्ति भाव श्रद्धा पूर्वक हर्ष उल्लासमय माहौल में मनाया गया सर्वप्रथम श्रद्धालु बंधुओ ने मां नर्मदा मैयाजी एवं गुरुजी की पूर्ण विधि विधान मंत्रउच्चारण के साथ पूजन अर्चन आरती वंदन कर आशीर्वाद ग्रहण किए जाने के उपरांत मंदिर पुजारी लखनलाल उप्पम ने गुरु की महिमा का बखान करते हुए बताया कि गुरु पूर्णिमा का पर्व उन सभी के जीवन में बहुत महत्व रखता है जो अपने गुरु द्वारा बताए दिशा में आगे बढ़े और उन्नति पाए क्योंकि गुरु के आशीर्वाद के बिना जीवन में कुछ भी पाना संभव नहीं है तभी तो गुरु पूर्णिमा पर सभी शिष्य गुरु की पूजन अर्चन आरती बंधानकर उनकी महिमा का गुणगान करते हैं क्योंकि गुरु के आशीर्वाद के बिना भगवान को प्राप्त करना असंभव है गुरु पूर्णिमा का दिव्य आशीर्वाद आपके जीवन को सुख और समृद्धि से भर देता है गुरु के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा से भरे दिन की सभी को बधाई दी जाती है गुरु की शिक्षाएं आपको सफलता और पूर्णता की ओर प्रेरित और मार्गदर्शन करती है, इस शुभ दिन पर, आप आध्यात्मिक रूप से बढ़ते रहें और सीखने के मार्ग में आनंद पाते है, इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु बंधुओ ने गुरु से आशीर्वाद लेकर अपना मानव जीवन धन्य किया।
फूलों का भव्य हार पहनाकर शंकराचार्यजी का अभिनंदन किया
गोटेगांव विगतदिवस गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर धार्मिक स्थल झोतेश्वर परमहंसी गंगा आश्रम स्थित अति सुंदर अति भव्य अति दिव्य आध्यात्म की ऊर्जा से ओत प्रोत समाधि मंदिर के नजदीक गोटेगांव सहित संपूर्ण आसपास क्षेत्र के अनेक नागरिकों ने परम पूज्य द्वारका शारदा पीठाधीश्वर स्वामी श्री सदानंद सरस्वतीजी का शंकराचार्य शिष्य मंडल गोटेगांव द्वारा अति सुंदर भव्य फूलों का हार माल्यार्पण कर पगड़ी पहनाकर श्री चरणों का आशीर्वाद लिया ! इस अवसर पर शेखर खरया अजीत खरया नीरज पंकज अमित यस शुभ कान्हा खरया सत्य प्रकाश अग्रवाल आनंद अग्रवाल रत्नेश राजपूत धर्मचंद गुप्ता बी.डी सोनी रामनारायण पटेल सहित अनेक भक्त परिवार सहित उपस्थित हुए। वही धर्म सभा में अनेक क्षेत्रों से आए हुए गणमान्य नागरिकों गुरु भक्तों ने गुरुदेव की पादुकाओं पर माल्यार्पण कर आशीर्वाद लिया।
गुरु पूर्णिमा केवल एक तिथि नहीं, आत्मा के जागरण का वह क्षण है जहाँ शिष्य अपने अस्तित्व को गुरुचरणों में कर देता है अर्पित- सुबुद्धानंदजी
गोटेगांव स्थित धार्मिक स्थल परमहंसी गंगा आश्रम इस आषाढ़ पूर्णिमा पर धर्म, साधना और भक्ति का जीवंत केंद्र बन गया। द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वतीजी महाराज ने प्रथम भगवान शिव का विधिपूर्वक अभिषेक कर गुरु पूर्णिमा महोत्सव की शुरुआत की। गंगाजल, दूध, दही, मधु और पुष्पों से पूजित शिवलिंग पर मंत्रोच्चार के बीच हुआ यह अभिषेक श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक आलोक का अनुभव रहा, भगवान शिव के पूजन के पश्चात शंकराचार्य जी महाराज ने वेदव्यास पूजन कर चार माह तक चलने वाले चातुर्मास व्रत का संकल्प लिया। यह व्रत त्याग, संयम, मौन और अध्ययन की महान परंपरा का प्रतीक है। चातुर्मास के इन दिनों में पूज्य शंकराचार्यजी परमहंसी गंगा आश्रम में ही प्रवास करेंगे और नियमित साधना, प्रवचन तथा गुरु परंपरा के अनुशीलन में रत रहेंगे।
गुरु की समाधि पर श्रद्धांजलि शिष्यत्व की पूर्णता
पूजनोपरांत पूज्य शंकराचार्य जी ने ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वतीजी महाराज की समाधि पर मौन नमन किया। गुरु-शिष्य की यह दुर्लभ परंपरा श्रद्धालुओं के लिए भावनात्मक क्षण बन गई। बहुत से भक्तों की आंखें उस पल नम थीं। मुख्य रूप से ब्रह्मचारी सुबुद्धानंद जी महाराज एवं
इस अवसर पर देश के विभिन्न भागों से दंडी स्वामी सन्यासी भी आश्रम पहुंचे। शास्त्रवेताओं, वैराग्य ध्वजाओं और गुरु-शिष्य परंपरा के प्रतीकों की यह उपस्थिति संन्यास परंपरा की शुद्धता और गरिमा को जीवंत करती रही। कई श्रद्धालुओं ने पहली बार इतनी संख्या में दंडी संन्यासियों का साक्षात दर्शन कर भावविभोर अनुभव किया।
ब्रह्मचारी सुबुद्धानंदजी महाराज
“गुरु पूर्णिमा केवल एक तिथि नहीं, आत्मा के जागरण का वह क्षण है जहाँ शिष्य अपने अस्तित्व को गुरुचरणों में अर्पित कर देता है। परमहंसी गंगा आश्रम की यह भूमि, ब्रह्मलीन पूज्यपाद जगद्गुरु स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज की तपस्थली रही है, और आज उनके परम शिष्य पूज्य शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज के सान्निध्य में जब भगवान शिव का अभिषेक, वेदव्यास पूजन और चातुर्मास व्रत का संकल्प संपन्न हुआ – तब यह भूमि केवल आश्रम नहीं, एक जीवंत तपोवन बन गई।
*विशाल भंडारे में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब*
पूजन के पश्चात आश्रम परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों में भक्ति और सेवा का अनुपम समन्वय देखने को मिला।
यह दिन केवल पूजन का नहीं था – यह सनातन परंपरा की पुनर्स्मृति थी। शिव की पूजा से लेकर वेदव्यास पूजन तक, और गुरु की समाधि पर मौन वंदन से लेकर दंडी संन्यासियों के सान्निध्य तक – यह आयोजन एक ऐसी कथा बन गया, जो वर्षों तक गोटेगांव की भूमि पर गूंजता रहेगा।







