बेटी-नवासे की मौत का दर्द और आंसुओं का धरना: प्रशासन ने खत्म कराया धरना प्रदर्शन, पीड़ित पिता को अस्पताल में किया भर्ती… इलाज जारी

रीवा । 26 अगस्त की रात को कल्पना मिश्रा और उसके नवजात शिशु की सीजर आपरेशन के बाद मौत हो गई थी। मौत के बाद आक्रोशित परिजन धरने पर बैठ गए थे। अस्पताल प्रबंधन ने आनन फानन में उन्हें मनाने और मामले को शांत करने नर्सों को निलंबित कर दिया। इसके बाद भी बात नहीं बनी तो डीन डॉ सुनील अग्रवाल ने दो डॉक्टरों को निलंबित कर दिया। मामले की जांच का इंतजार नहीं किया गया। इसके बाद भी पिता और परिजन नहीं मानें, 2 सितंबर से सिरमौर चौराहा पर धरना शुरू हुआ। इसके बाद अधीक्षक डॉ राहुल मिश्रा को हटाया गया। फिर मांग जोर पकड़ी, आंदोलन बढ़ा तो डीन डॉ सुनील अग्रवाल को भी हटा दिया गया। इसके बाद भी पिता और परिजन नहीं मानें धरना जारी रहा। मौके पर कलेक्टर, एसपी पहुंचे। मनाने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। मेडिकल कॉलेज में ईसी की बैठक सुबह आयोजित की गई। जैसे ही बैठक खत्म हुई। वैसे ही सिरमौर चौराहा पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहुंच गए। उन्होंने पहले मंच तक पहुंच कर पिता को कब्जे में लिया। एम्बुलेंस पहले से ही चौराहा पर खड़ी थी। कल्पना के पिता रामशिरोमणि मिश्रा को उठाकर एम्बुलेंस में डाला गया। फिर उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया।

फिलहाल उनके स्वास्थ्य का परीक्षण और इलाज जारी है। कार्रवाई के दौरान पूरा पुलिस और प्रशासनिक अमला मौजूद रहा। कलेक्टर और एसपी भी मौके पर पहुंचे थे। सीएसपी, कई थानों का पुलिस बल और थाना प्रभारी मौजूद थे। इसके अलावा प्रशासनिक अधिकारी भी तैनात रहे। सिरमौर चौराहा में भारी भीड़ थी लेकिन समर्थन करने वाले ज्यादा नहीं थे। इसके कारण पुलिस का काम आसान हो गया।

पुलिस ने सभी को उठाने का काम किया और नगर निगम ने टेंट का सामान बटारने का काम किया। चंद मिनटों में ही पूरा पंडाल गायब हो गया।मौके पर कल्पना के पिता और परिजनों के अलावा नेता भी थे। जो भी मंच से नेतागिरी कर रहे थे। वह पहले से ही पुलिस और प्रशासन की नजर में गड़े हुए थे। पुलिस ने सबसे पहले उन्हें ही दबोचा। सीधे पुलिस की गाड़ी में डाला और थाना उठा ले गई। थाना में मामला शांत होने तक बैठा कर रखा गया।







