
नई दिल्ली,यश भारत।कर्मचारी भविष्य निधि (पीएफ) से जुड़े नियमों में बदलाव को लेकर कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पीएफ के लिए मूल वेतन की सीमा 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये किए जाने का प्रस्ताव है। यह सीमा बेसिक वेतन और महंगाई भत्ते पर लागू होगी, पूरी सीटीसी या सकल वेतन पर नहीं।
बताया गया है कि इस बदलाव से ऐसे कर्मचारियों की संख्या बढ़ सकती है, जिन्हें कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) और कर्मचारी जमा सहबद्ध बीमा योजना (ईडीएलआई) जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभ मिलेंगे। हालांकि, नई 25 हजार रुपये की सीमा के लागू होने की स्थिति और विस्तृत प्रावधानों को संबंधित अधिसूचना के आधार पर ही अंतिम रूप से माना जाएगा।मौजूदा व्यवस्था में पीएफ योगदान की गणना और वेतन सीमा से जुड़े प्रावधानों के तहत कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान निर्धारित नियमों के अनुसार होता है। वहीं अधिक वेतन पर योगदान के लिए अलग प्रावधान और स्वैच्छिक योगदान की व्यवस्था भी मौजूद है।


उदाहरण से समझें:
यदि किसी कर्मचारी का बेसिक वेतन और डीए मिलाकर 20 हजार रुपये है और नई 25 हजार रुपये की सीमा लागू होती है, तो 12 प्रतिशत के हिसाब से कर्मचारी का हिस्सा 2,400 रुपये तथा नियोक्ता का हिस्सा भी 2,400 रुपये होगा। हालांकि वास्तविक योगदान संबंधित नियमों और अधिसूचना के प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
केंद्र सरकार ने 29 जून 2026 को ईपीएफ योजना, 2026 अधिसूचित की है। इसी अवधि में कर्मचारियों को ईपीएफ कवरेज में शामिल करने के लिए कर्मचारी नामांकन अभियान भी शुरू किया गया है। ईपीएफओ के अनुसार यह अभियान 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा और इसका उद्देश्य पात्र कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन तथा बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं के दायरे में लाना है। नए प्रावधान लागू होने के बाद कर्मचारियों और नियोक्ताओं के योगदान, वेतन सीमा और पेंशन संबंधी नियमों को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट होगी। इसलिए कर्मचारियों के लिए अंतिम अधिसूचना और ईपीएफओ की ओर से जारी दिशा-निर्देश महत्वपूर्ण होंगे।







