कटनी

पहले दिन 28 बने जमीन के मालिक, स्वामित्व योजना : हड़ताल समाप्त होने के बाद काम पर लौटे पटवारी, 9 तहसीलों में एक लाख 5 हजार रजिस्ट्री का जिम्मा 293 पटवारियों को

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कटनी, यशभारत। स्वामित्व योजना शुरू होने के 25 दिन बाद सोमवार से कटनी जिले के गांवों में जमीन और मकानों की नि:शुल्क रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू हो गई। पटवारियों की हड़ताल समाप्त होने के बाद इस योजना पर कल से काम शुरू हो गया है। राजस्व विभाग ने सोमवार को पूरे जिले में 28 लोगों को जमीन की रजिस्ट्री प्रदान की। कटनी तहसील में सबसे ज्यादा 11 लोगों को इस योजना का लाभ मिला जबकि बहोरीबंद तहसील ऐसी रही, जहां अभी तक खाता नहीं खुला है। राजस्व विभाग की मानें तो अगले कुछ दिनों में इस योजना के काम में तेजी जाएगी। राजस्व विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कटनी जिले की सभी 9 तहसीलो में एक लाख 5 हजार 585 रजिस्ट्री की जाना है, जिसमे एक लाख 35 हजार 733 परिवारों को लाभांवित किया जाएगा। बताया जाता है कि कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से भी लोग रजिस्ट्री की प्रक्रिया की जा रही है। अब तक 371 लोगों ने सीएससी के माध्यम से प्रक्रिया पूर्ण की है। राजस्व विभाग ने बताया कि पूरे जिले में 293 पटवारी इस काम में लगे हुए हैं। गौरतलब है कि स्वामित्व योजना लागू होने के बाद पटवारियों को निष्पादक बनाए जाने को लेकर पूरे प्रदेश में पटवारी संघ ने हड़ताल यशुरू कर दी थी। विदित हो कि स्वामित्व योजना की शुरूआत 17 सितंबर से हुई थी। ग्रामीण इलाकों में आबादी भूमि पर बसे परिवारों के पास अक्सर अपनी संपत्ति का कोई रजिस्टर्ड कानूनी दस्तावेज नहीं होता था। इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में स्वामित्व योजना की शुरुआत की थी। इसके अंतर्गत गांवों की आबादी भूमि का अत्याधुनिक ड्रोन सर्वे करवाकर अधिकार अभिलेख तैयार किए गए।
पीढिय़ों से काबिज लोगों को मिलेगा मालिकाना हक
कटनी जिले में पीढिय़ो से अपने मकान और आबादी भूमि पर रह रहे ग्रामीण परिवारों को अब मालिकाना हक का पक्का कानूनी दस्तावेज मिलने जा रहा है। कटनी जिले में स्वामित्व योजना के तहत एक लाख 5 हजार 585 निजी संपत्तियों की फ्री रजिस्ट्री की जाएगी। योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से रह रहे परिवारों को उनकी संपत्ति का वैधानिक अधिकार प्रदान करना है।
पंचायत स्तर पर मिलेगी सुविधाएं
योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को किसी भी प्रकार की स्टाम्प ड्यूटी या पंजीयन शुल्क का भुगतान नहीं करना पड़ रहा है। रजिस्ट्री की प्रक्रिया का पूरा खर्च राज्य सरकार स्वयं वहन कर रही है। नागरिकों को किसी रजिस्ट्रार कार्यालय जाने की जरूरत नहीं है, बल्कि ग्राम पंचायत स्तर पर ही विशेष शिविर आयोजित कर डीड की जा रही है। यह लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा, जिनका नाम पूर्व आयोजित स्वामित्व योजना के सर्वे में स्वीकृत हो चुका है। फिलहाल कोई नया आवेदन स्वीकार नहीं किया जा रहा है। केवल तैयार रिकॉड्र्स को रजिस्ट्री का रूप दिया जा रहा है। हितग्राहियों को पक्की रजिस्ट्री के साथ इसकी डिजिटल कॉपी भी दी जाएगी।
कानूनी दस्तावेज से मजबूत होगी वित्तीय स्थिति
अक्सर लोग प्रॉपर्टी कार्ड और रजिस्ट्री को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों में बड़ा अंतर है। प्रॉपर्टी कार्ड केवल यह प्रमाणित करता है कि शासकीय सर्वे में संबंधित व्यक्ति का नाम दर्ज है। इसके ठीक विपरीत रजिस्ट्री एक पंजीकृत कानूनी दस्तावेज होता है, जो व्यक्ति के मालिकाना हक को पूर्णत: कानूनी रूप से पक्का और सुरक्षित बनाती है।

 

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