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जिला कार्यसमिति की पहली ही बैठक में नहीं पहुंचे 3 विधायक, भाजपा में ऊपर से सब ठीक दिखाने की कोशिश, लेकिन अंदर से हालात खराब

आगामी चुनावों में महंगी न पड़ जाए कार्यकर्ताओं की नाराजगी

कटनी, यशभारत। जिले के भाजपा संगठन में ऊपर से ऑल इज वेल दिखाने की कोशिश जरूर की जा रही है, लेकिन अंदर से सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। इसका ताजा उदाहरण है दो दिन पहले हुई जिला कार्यसमिति की बैठक। पहली ही बैठक में जिले के चार में से तीन विधायक नहीं पहुंचे। इतनी महत्वपूर्ण बैठक में गैरहाजिर रहकर विधायकों ने जिला संगठन और इसके सरपरस्तों को क्यों आईना दिखाया, इसकी पार्टी में चर्चा हो रही है। कार्यकर्ता दबी जुबान में कह रहे हैं कि नियुक्तियों में जिस तरह एक गुट विशेष का दबदबा सामने आया, उसने अनेक नेताओं और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को नाराज कर दिया है।

गौरतलब है कि जिला कार्यसमिति की बैठक अनिवार्य रूप से हर 3 महीने में कम से कम एक बार (यानी वर्ष में 4 बार) होनी चाहिए। दो जिला कार्यसमिति बैठकों के बीच 3 महीने से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए। यदि किसी ज़िला, मंडल या क्षेत्रीय समिति की बैठक 6 महीने तक एक बार भी आयोजित नहीं होती है, तो वह इकाई नियमों के तहत स्वतः ही भंग मानी जाती है। आमतौर पर राष्ट्रीय और प्रदेश कार्यसमिति की बैठकों के संपन्न होने के तुरंत बाद जिला स्तर की कार्यसमिति बैठकें बुलाई जाती हैं ताकि शीर्ष नेतृत्व द्वारा तय की गई रणनीतियों और आगामी कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर लागू किया जा सके। कटनी में पार्टी ने बैठक के दो दिन पहले ही विशेष आमंत्रित, स्थाई आमंत्रित और कार्यसमिति सदस्यों की सूची जारी की। इस सूची को लेकर असंतोष सामने आया, जिसका असर जिला कार्यसमिति की बैठक में नजर आया। जानकारी के अनुसार बैठक में जिले के चार में तीन विधायक संदीप जायसवाल, प्रणय पांडे और धीरेन्द्र सिंह नहीं पहुंचे। इसके अलावा कार्यसमिति के कई सदस्यों के न पहुंचने पर खाली कुर्सियों को भरने के लिए ऐसे लोगों को बिठा लिया गया जो कार्यसमिति के सदस्य ही नहीं है।

नियुक्तियों में मनमानी को लेकर असंतोष

सूत्र बताते हैं कि जिला संगठन के कर्ताधर्ताओं की कार्यप्रणाली को लेकर कार्यकर्ताओं में भीतर ही भीतर असंतोष पनप रहा है। पिछले दिनों नगर निगम ऑडिटोरियम में आयोजित हुए संत रविदास जयंती के प्रशासनिक जानकारी कार्यक्रम को पार्टी की ओर से हाइजेक करने की कोशिशों के बावजूद बमुश्किल एक सैकड़ा कार्यकर्ता भी नहीं जुट पाये, नतीजतन मंडल अध्यक्षों को कलश सौंपने पड़े, जबकि ऐसा कोई कार्यक्रम निर्धारित नहीं था। सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ समय से जिस तरह कटनी में संगठन को एक गुट विशेष द्वारा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह हांका जा रहा है उससे भीतर ही भीतर कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष पनप चुका है। पार्टी के हर अहम पद इसी गुट के समर्थकों से भरे जा रहे हैं। पार्टी अगले साल होने वाले नगरीय निकाय और 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जरूर जुट रही है लेकिन कटनी जिले में जमीनी हालात खराब है। वैसे भी जेन जी मूवमेंट के बाद पार्टी बैकफुट पर है। समय रहते कटनी में अगर नेतृत्व परिवर्तन नहीं हुआ तो पार्टी को विधानसभा और लोकसभा चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। बताया जा रहा है कि जिला कार्यसमिति बैठक में विधायकों ने जिलाध्यक्ष की मनमानी कार्यप्रणाली को लेकर ही दूरी बनाई, हालांकि सार्वजनिक रूप से विधायक यह बात कहने से परहेज कर रहे हैं। सूत्रों से खबर तो यह भी मिल रही है कि कार्यसमिति की बैठक में नेताओं ने मोबाइल की रिकार्डिंग बंद कराकर साफ कहा कि अपनी ही सरकार में अपनी सुनवाई नहीं। पिछले दिनों एक उद्योगपति के साथ जमीन के विवाद में गिरफ्तार और फरार हुए भाजपा नेताओं का हवाला देते हुए कहा गया कि उनकी जमानत नहीं हो पा रही। सरकार अपनी है लेकिन पुलिस चालान पेश नहीं कर रही। सूत्र बताते हैं कि जिला कार्यसमिति की बैठक में सीधे तौर पर सत्तापक्ष की कमजोरी भी उजागर हो गई कि भाजपा नेताओं का प्रशासन पर न तो कोई दवाब है और न सुनवाई हो रही।

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