जहरीली शराब त्रासदी : किसी का कुलदीपक बुझा तो कोई मासूम हुआ बेसहारा, प्रशासनिक दावों पर उठे सवाल, करीब 19 की मौत
बंडा शराब त्रासदी: मौतों के आंकड़ों पर उलझा प्रशासन, कई हंसते-खेलते परिवार हुए तबाह

सागर, यशभारत ।क्षेत्र में कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भारी तूल पकड़ लिया है। एक ओर जहां जहरीली शराब के सेवन से कई घरों के चिराग बुझ गए, वहीं दूसरी ओर मौतों की वास्तविक संख्या को लेकर जिला प्रशासन, राज्य सरकार और विपक्ष के दावों में भारी विरोधाभास नजर आ रहा है।

आंकड़ों को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक खींचतान
मामले में जिला प्रशासन का कहना है कि अब तक केवल 12 मौतों की ही आधिकारिक पुष्टि हुई थी जो की अब 19 बताई जा रही है, जबकि अन्य मौतों का कारण हार्ट अटैक बताया जा रहा है। दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर मौतों के असल आंकड़े छिपाने का गंभीर आरोप लगाया है। विपक्ष का दावा है कि इस त्रासदी में अब तक 25 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
ज्यादातर मृतक 25 से 35 वर्ष के युवा
राजनीतिक बयानबाजी और प्रशासनिक दावों से इतर, इस दुखद घटना का सबसे खौफनाक पहलू यह है कि इस त्रासदी में जान गंवाने वाले अधिकतर लोग 25 से 35 वर्ष की आयु वर्ग के थे। ये वे युवा थे, जिन पर अपने पूरे परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी थी। इनके अचानक चले जाने से कई मासूम बच्चे बेबस और बेसहारा हो गए हैं।
दिहाड़ी मजदूरी से संवरती जिंदगी को लील गई जहरीली शराब, बेसहारा छोड़ गई दो मासूम और वृद्ध पिता
30 साल के करतार सिंह लोधी अपने हाथों में उम्मीदें और आंखों में अपने बच्चों के बेहतर कल के सपने लिए मजदूरी के लिए घर से निकले थे। मेहनत-मजदूरी से मिलने वाली दिहाड़ी से ही उनके घर का चूल्हा जलता था। करतार अपने छोटे से परिवार के लिए रीढ़ की हड्डी थे, लेकिन किसे पता था कि बंडा क्षेत्र में फैली जहरीली शराब का काला साया उनके हंसते-खेलते घर को हमेशा के लिए अंधेरे में धकेल देगा।
जहरीली शराब के सेवन से अचानक करतार की तबीयत बिगड़ी और देखते ही देखते उनकी सांसें थम गईं। करतार तो चले गए, लेकिन अपने पीछे छोड़ गए एक ऐसा दर्द और सन्नाटा, जिसे पूरा कर पाना अब नामुमकिन है।
अनजान मासूमों के सिर से उठा साया
करतार के परिवार में उनकी 3 साल की मासूम बेटी और 2 साल का छोटा बेटा है। वे बच्चे इतने छोटे हैं कि उन्हें यह भी समझ नहीं है कि अब उनके पिता कभी लौटकर नहीं आएंगे। पिता के हाथों से मिलने वाली दुलार की जगह अब घर में पसरे मातम ने ले ली है। वे दोनों मासूम दुनिया की समझ से बेखबर, बस अपने घर में बिखरे दुख के माहौल को निहार रहे हैं।
वृद्ध पिता के कंधों पर दुखों का पहाड़
करतार के वृद्ध पिता जोधन सिंह, जो खुद इस उम्र में मजदूरी करके परिवार का सहारा बनते थे, आज अपने जवान बेटे की अर्थी उठाकर पूरी तरह टूट चुके हैं। जिस उम्र में बेटे को पिता का सहारा बनना चाहिए था, उस उम्र में जोधन सिंह पर अब दो छोटे पोते-पोतियों और पूरे परिवार के पालन-पोषण का संकट आ खड़ा हुआ है। बूढ़ी आंखों में आंसू संभाले जोधन सिंह अब बस अपने मासूम पोते-पोतियों के भविष्य को लेकर बदहवास और चिंतित हैं।
बंडा शराब त्रासदी में करतार सिंह तो महज एक आंकड़ा बनकर रह गए, लेकिन उनकी मौत ने एक पूरे हंसते-खेलते परिवार की डोर तोड़ दी है। आज यह बेबस परिवार शासन और प्रशासन की ओर उम्मीद लगाए बैठा है कि शायद उनके मासूमों के भविष्य के लिए कोई संबल मिल सके।







