क्लेम खारिज करने पर बीमा कंपनी पर लगा जुर्माना, उपभोक्ता आयोग ने कहा— ‘डॉक्टर तय करेंगे इलाज, बीमा कंपनी नहीं’

सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम खारिज करने के एक मामले में बीमा कंपनी की मनमानी पर कड़ा रुख अपनाते हुए जुर्माना ठोंका है। आयोग ने कंपनी की उस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि मरीज का इलाज अस्पताल में भर्ती हुए बिना ओपीडी (OPD) में भी हो सकता था। आयोग ने इसे सेवा में घोर कमी मानते हुए पीड़ित को क्लेम की पूरी राशि ब्याज सहित लौटाने और मानसिक क्षतिपूर्ति देने का ऐतिहासिक आदेश जारी किया है।
यह पूरा मामला एक उपभोक्ता द्वारा अचानक पेट में तेज दर्द उठने के बाद डॉक्टर की सलाह पर अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराने से जुड़ा है। स्वस्थ होने के बाद जब मरीज ने इलाज के खर्च का क्लेम बीमा कंपनी के पास भेजा, तो कंपनी ने तकनीकी पेंच फंसाते हुए दावा रिजेक्ट कर दिया कि इस बीमारी के लिए अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं थी। कंपनी के इस मनमाने रवैये से तंग आकर उपभोक्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग की शरण ली।
मामले की प्रामाणिक सुनवाई करते हुए उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को कड़ी फटकार लगाई। आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि कोई भी मरीज शौक से अस्पताल में भर्ती नहीं होता, बल्कि यह निर्णय मरीज की तात्कालिक गंभीर स्थिति को देखकर संबंधित डॉक्टर लेते हैं। बीमा कंपनी घर बैठे यह तय नहीं कर सकती कि किस मरीज का इलाज कैसे होना चाहिए। आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह परिवादी को अस्पताल के खर्च की मूल राशि ब्याज सहित चुकाए, साथ ही मानसिक प्रताड़ना और अदालती खर्च के रूप में हर्जाने का भुगतान करे।






