कपिलधारा में पार्किंग के नाम पर वसूली का खेल? : जंगल में खड़े वाहनों से शुल्क, सुविधाएं नदारद

यशभारत डिंडोरी/अमरकंटक ।मध्यप्रदेश के विश्वप्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल अमरकंटक स्थित कपिलधारा में पार्किंग व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि नगर परिषद अमरकंटक द्वारा पर्यटकों के वाहनों से पार्किंग शुल्क तो वसूला जा रहा है, लेकिन जिस स्थान पर वाहन खड़े कराए जाते हैं, वहां न तो विकसित पार्किंग स्थल है और न ही किसी प्रकार की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं।
पर्यटकों और स्थानीय लोगों के अनुसार कपिलधारा पहुंचने वाले वाहनों को सड़क किनारे अथवा जंगल क्षेत्र में खड़ा कराया जाता है। इसके बावजूद पार्किंग शुल्क लिया जाता है, जबकि मौके पर सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरे, शेड, निर्धारित पार्किंग लाइन, वाहन स्टैंड या अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं दिखाई नहीं देतीं। ऐसे में पर्यटक यह सवाल उठा रहे हैं कि जब व्यवस्थित पार्किंग की सुविधा ही उपलब्ध नहीं है तो शुल्क किस आधार पर वसूला जा रहा है।
कई सवालों के घेरे में पार्किंग व्यवस्था
इस पूरे मामले ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। प्रमुख सवाल यह हैं कि क्या बिना विकसित पार्किंग स्थल के शुल्क वसूलना नियमों के अनुरूप है? क्या इस पार्किंग स्थल के संचालन के लिए नगर परिषद के पास विधिवत अनुमति एवं अधिसूचना उपलब्ध है? प्रतिदिन पार्किंग शुल्क के रूप में कितनी राशि वसूली जाती है और उसका लेखा-जोखा किस प्रकार रखा जाता है? यदि पार्किंग स्थल पर कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो पर्यटकों से शुल्क लेना कितना उचित है?
कपिलधारा आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों का कहना है कि यदि पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है तो बदले में सुरक्षित, व्यवस्थित और सुविधायुक्त पार्किंग उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था केवल शुल्क वसूली तक सीमित नजर आती है, जबकि सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।
पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन तथा संबंधित विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, पार्किंग शुल्क वसूली की वैधता सार्वजनिक करने तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कपिलधारा में पार्किंग शुल्क की वसूली पूरी तरह नियमों के अनुरूप की जा रही है, या फिर इसके पीछे कोई अनियमितता है? इसका स्पष्ट जवाब प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।







