कटनी के जंगलों में बाघों की गिनती पूरी, प्रदेश स्तर पर जारी होंगे आंकड़े, पहले से संख्या बढऩे की उम्मीद

कटनी, यशभारत। कटनी जिला चारों ओर से जंगलों से घिरा हुआ है। बांधवगढ़ के बफर जोन और पन्ना टाइगर रिजर्व की सीमा से सटे होने के कारण कटनी के जंगलों में बड़ी तादात में बाघ की मौजूदगी है। बरही तहसील के अंतर्गत आने वाले गांवों के साथ ही सडक़ पार करते हुए बाघों को आासानी से देखा जा सकता है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर बाघ मूवमेंट के वीडियो भी वायरल हो रहे हैं। इसको लेकर जब वन मंडल अधिकारी गर्वित गंगवार से बात की गई तो उनका कहना है कि बाघ कभी जंगल तो कभी अन्य स्थानों पर मूवमेंट करता रहता है। सडक़ पार करने के दौरान लोग वीडियो भी बना लेते हैं। जो सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं। बाघ जब मूवमेंट करते हुए आबादी इलाकों या गांवों के आसपास आता हैं, तब अलर्ट जारी किया जाता है, ताकि कोई घटना न हो। वन मंडल अधिकारी गर्वित गंगवार ने बताया कि जंगलों में कितने बाघ है, इसकी गणना का काम प्रदेश स्तर पर किया जाता है। प्रदेश में बाघों की गिनती का काम पूरा हो चुका है और इसकी जानकारी अगले कुछ दिनों में सामने आएगी।
2022 की गणना में 785 बाघ
मध्यप्रदेश की बात करें तो बाघ गणना के दौरान राज्य में बाघों की संख्या 1 हजार से अधिक पहुंचने का अनुमान है। वर्ष 2022 की आधिकारिक अखिल भारतीय बाघ गणना के अनुसार मध्यप्रदेश में 785 बाघ दर्ज किए गए थे, जिसके बाद प्रदेश को शीर्ष टाइगर स्टेट का दर्जा मिला। बाघों की संख्या बढऩे से अब वे टाइगर रिजर्व से निकलकर नए व असंरक्षित क्षेत्रों में फैल रहे हैं, जिससे उनके लिए सुरक्षित कॉरिडोर और मानव वन्यजीव संघर्ष को रोकना एक बड़ी चुनौती बन गया है। प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में बाघ संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां चल रही हैं। वन विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों और वन समितियों को भी संरक्षण के काम से जोड़ा गया है।
गणना से तय होती है नीतियां : डीएफओ
डीएफओ गर्वित गंगवार ने बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के निर्देश पर बाघों की गणना कराई जाती है। इसके जरिए भारत सहित सभी राज्यों की वन संरक्षण नीतियों का निर्धारण किया जाता है। मैदानी सर्वेक्षण के दौरान बाघों और अन्य मांसाहारी वन्य जीवों के पद चिन्ह, मल, पेड़ों पर और जमीन पर उनके पंजों की खरोंच, उनके द्वारा शिकार किये गये शिकारों के अवशेष संकलित कर दर्ज किए गए हैं।







