मध्य प्रदेशराज्य

इस शैक्षणिक सत्र में जर्जर भवनों में लगेंगी कक्षाएं : 334 स्कूल भवन जर्जर, 95 के मरम्मत के लिए मांगी राशि, मिली 50 फीसदी 

मंडला। पिछले वर्ष प्रदेश के कई जिलो में हुई स्कूल भवन गिरने की घटनाओ के बाद मंडला जिले में ऐसे स्कूलो की जमीनी हकीकत जानी गई। यहां जिला शिक्षा केन्द्र के अधिकारियो को जिले के प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं के कुल 334 स्कूल भवन जर्जर अवस्था में मिले। इनमें से 95 स्कूल भवन तो इतने खतरनाक रहे कि उनकी मरम्मत तत्काल कराने की जरूरत रही है। इसके लिए जिला शिक्षा केन्द्र मंडला के द्वारा शासन आरएसके को मरम्मत के लिए राशि की मांग की है लेकिन आधे ही स्कूलो को मरम्मत के लिए राशि मिल सकी है। शेष स्कूलो के हाल ज्यों के त्यों बने हुए है अब शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया है और रैनी सीजन की आमद हो गई। एक बार फिर शैक्षणिक स्टाप और अभिभावको को जर्जर स्कूलो में नौनिहालो को अध्ययन के लिए भेजने डर सता रहा है। बारिश के दौरान भवनों के गिरने का जोखिम और बढ़ जाता है, जिससे बच्चों की जान को खतरा हो सकता है। शासन की ओर से आधे स्कूलों को ही राशि मिलने के बाद अन्य स्कूलों के बच्चों का भविष्य और सुरक्षा अधर में लटकी हुई है।

जानकारी के अनुसार शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार लाने के लिए शासन के द्वारा नवीन स्कूल भवन बनाए जा रहे लेकिन पुराने स्कूल भवनो पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ना इनकी मरम्मत कराई जा रही है और ना ही सुविधाओ में इजाफा किया जा रहा है। कई दशक पुराने स्कूल भवनो में अध्ययन करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रो के बच्चो को जाना पड़ रहा है। यहां जिला शिक्षा केन्द्र मंडला के द्वारा स्कूलो की मरम्मत के लिए राशि की मांग की गई लेकिन राज्य शिक्षा केंद्र आरएसके द्वारा आधे ही स्कूलों के लिए राशि जारी नहीं की गई है। इस वित्तीय अड़चन के कारण इस शैक्षणिक सत्र में जर्जर स्कूलों में ही कक्षाएं संचालित करने की मजबूरी बन गई। बारिश के मौसम में इन भवनों में पढऩे वाले छात्र छात्राओं के लिए हादसे का डर बना रहता है। यह स्थिति बच्चों की सुरक्षा और उनके शैक्षणिक दोनों के लिए चिंताजनक है। ग्रामीण अंचलों में कई स्थानों पर शैक्षणिक कर्मचारी स्कूल का संचालन अन्य सुरक्षित शासकीय भवनों का उपयोग करते है। जिससे छोटे बच्चे किसी भी तरह के हादसे का शिकार न हों। इन जर्जर भवनों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों और शिक्षकों में गहरी चिंता व्याप्त है।

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इतने है जिले में स्कूल

मंडला जिले में कक्षा 1 से 8 तक के कुल 2678 सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल संचालित हैं। इन स्कूलों का संचालन शिक्षा विभाग और आदिवासी विकास विभाग द्वारा किया जाता है। प्राथमिक शालाएं कक्षा 1 से 5 लगभग 2078 स्कूल, माध्यमिक शालाएं कक्षा 6 से 8 तक 600 स्कूल है। इनमें स्कूलो में जिले के लाखो नौनिहालो के नाम दर्ज है लेकिन स्कूलो में मूलभूत सुविधाओ की कमी है।

शासकीय स्कूलो के जीर्णशीर्ण और जर्जर हो जाने और कई घटनाएं हो जाने के बाद शासन से नवीन भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। गत वर्ष जिले में 6 स्कूल भवन निर्माण की स्वीकृति मिली थी। जिनका निर्माण कार्य प्रगतिरत है और इस शैक्षणिक सत्र में करीब 14 स्कूलो के लिए नए भवन निर्माण के लिए हरी झंडी मिली हुई है। इन नवीन स्कूल भवनो का निर्माण ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के द्वारा किया जा रहा है।

मंडला जिले के कई सरकारी स्कूल जीर्णशीर्ण अवस्था है। यहां पिछले साल ग्राम बुजबुजिया और खुडिय़ा के प्राथमिक विद्यालयों के जर्जर भवनों को लेकर ग्रामीण जनो ने दर्जनो शिकायत की। बारिश के दौरान छत से प्लास्टर गिरने और पानी टपकने से बच्चो को परेशानी का सामना करना पड़ता रहा। इस सीजन में बुजबुजिया गांव का स्कूल भवन का डिस्मेंटल कर नए सिरे निर्माण कार्य शुरू किया जा रहा है।

इनका कहना है…

गत वर्ष जर्जर स्कूलो का भौतिक निरीक्षण किया गया था। करीब 95 स्कूलो को मरम्मत की दरकार रही। प्रापोजल स्वीकृति के लिए आरएसके भेजे गए थे। इसमें पचास फीसदी स्कूलो के लिए राशि प्राप्त हो सकी।

सुरेन्द्र यादव, सहायक यंत्री जिला शिक्षा केन्द्र मंडला।

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