आखिर कैसे पढे़गा इडिया? : अफसरों की फाइलों में विकास, जमीन पर बेबस नौनिहाल: 3 साल और अनगिनत अर्जियों के बाद भी छत नहीं…

मण्डला यशभारत। शासन “स्कूल चलें हम” और “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, लेकिन मण्डला जिले की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जिले के विकासखंड मवई अंतर्गत ग्राम पंचायत देवरीदादर के आश्रित ग्राम झूलनटोला टोला में संचालित प्राथमिक शाला का भवन पिछले कई वर्षों से जर्जर अवस्था में है। छत और दीवारें पूरी तरह टूट चुकी हैं।डिस्मेंटल का आदेश करके अधिकारी नये भवन बनवाने भूल गए हैं। आज तक नए भवन की स्वीकृति नहीं मिली। मजबूरी में बच्चे असुरक्षित खुले आसमान के नीचे या किसी के निजी घर में पढ़ने को मजबूर हैं।इस गंभीर समस्या को ब्लाक ,जनपद और अब कलेक्टर के समक्ष उनके चेंबर में पहुंचकर भी रखी गई है। जिसमें कलेक्टर ने जून 2026 तक भवन बनवाये जाने का आस्वासन दिया है।
दस्तावेजों से खुलासा
ग्रामवासियों द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अनुसार इस समस्या को लेकर अक्टूबर 2024 को सरपंच द्वारा खंड शिक्षा अधिकारी मवई को पत्र लिखा गया। फिर अगस्त 2026 को ग्राम सभा की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर शासन से नए भवन की मांग की गई। इसके बावजूद विभाग ने आंखें मूंद रखी हैं। ग्रामवासियों ने बताया कि मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के शिविर में भी कलेक्टर को ज्ञापन दिया गया था, पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।
जिले भर का यही हाल
शिक्षा विभाग के अधिकारी भले ही आंकड़ों में 100% नामांकन दिखाएं, पर हकीकत यह है कि मण्डला जिले के प्रायः सभी विकासखंडों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी, जर्जर भवन और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
पालकों में आक्रोश
पालकों का कहना है, कि जब तक जनप्रतिनिधि और अधिकारी स्कूल का निरीक्षण नहीं करेंगे, तब तक स्थिति नहीं सुधरेगी। “अगर किसी भी समय छत या दीवाल गिर गई तो जिम्मेदार कौन होगा? क्या बच्चों की जान की कोई कीमत नहीं?” यह सवाल अब हर गांव में गूंज रहा है। मांग: देवरीदादर झूलनटोला के सैकड़ों की संख्या में महिला पुरुष जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर और डीपीसी से मांग की है, कि उनके इस स्कूल और जिले के ऐसे सभी जर्जर स्कूलों का सर्वे कराकर 1 महीने के अंदर नए भवन स्वीकृत किए जाएं, अन्यथा आंदोलन किया जाएगा।
“विकासखंड मवई के देवरीदादर झूलन टोला में तीन वर्षों से प्राथमिक शाला के लगभग पांच दर्जन बच्चों की पढ़ाई किसी भी ग्रामीण के खुले असुरक्षित आंगन में लगाया जाना ग्रामीणों ने बताया है।इस तरह की परिस्थितियां जिले के सैकड़ों स्कूलों की हैं, आवेदन निवेदन, सोशल मीडिया, मीडिया के माध्यम से शासन-प्रशासन के सामने अनेकों बार लाने के बाद भी कोई सुधार नहीं हो रहा है, जिससे खासकर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों के बच्चों का भविष्य अंधकारमय बना हुआ है। प्रशासन का ध्यान समय से पहले नहीं गया तो अच्छी शिक्षा के लिए पालकों को सड़कों पर आने मजबूर होना पड़ेगा।”
पी.डी.खैरवार
जिला अध्यक्ष पालक महासंघ मण्डला







