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तीन साल से अटका आधार, जबलपुर में चुटकियों में सुलझा मामला; दूसरे शहरों से पहुंच रहे लोग,देखे वीडियो

पुराने रिकॉर्ड की तलाश में सामने आ रही तकनीकी दिक्कतें, जांच के बाद बन रहा आधार

रिपोर्टर [आकाश पांडेय ]..जबलपुर,  यश भारत। आधार से जुड़ी पुरानी और जटिल समस्याओं के समाधान के लिए अब दूसरे शहरों के लोग भी जबलपुर का रुख कर रहे हैं। लंबे समय से अटके मामलों की रिकॉर्ड स्तर पर जांच कर समाधान किए जाने से जबलपुर का आधार केंद्र लोगों के लिए उम्मीद का केंद्र बनता जा रहा है। सिवनी के रोहित का मामला इसका उदाहरण है, जिसकी करीब तीन साल से आधार संबंधी समस्या बनी हुई थी और इसका असर उसकी पढ़ाई पर भी पड़ रहा था।

पुरानी रसीद लेकर पहुंचा, जांच में मिला रिकॉर्ड

सिवनी निवासी रोहित सातवीं कक्षा के बाद आधार से जुड़ी परेशानी के कारण आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहा था। वह अपनी पुरानी आधार एनरोलमेंट रसीद लेकर जबलपुर पहुंचा। यहां अधिकारियों ने उसकी जानकारी को अलग-अलग स्तर पर जांचा। पिनकोड, जन्मतिथि, जन्म वर्ष और अन्य विवरणों के आधार पर पुराने रिकॉर्ड की तलाश की गई। जांच के दौरान उसका पूर्व आधार रिकॉर्ड मिल गया और जानकारी का मिलान होने के बाद आधार जनरेट हो गया।

दोबारा आवेदन करना पड़ सकता है भारी

अधिकारियों के मुताबिक कई ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनमें व्यक्ति का आधार 2012, 2013 या 2014 में ही बन चुका होता है। कार्ड नहीं मिलने या जानकारी उपलब्ध नहीं होने पर लोग दोबारा आधार के लिए आवेदन कर देते हैं। ऐसे में नया एनरोलमेंट तकनीकी कारणों से रिजेक्ट हो सकता है। छोटी सी जानकारी का मिसमैच भी पुराने रिकॉर्ड की तलाश को मुश्किल बना देता है। कुछ मामलों में रिकॉर्ड खोजने में एक से दो घंटे तक लग जाते हैं।

महिला का मामला भी जांच के बाद हुआ हल

इसी तरह एक महिला का आधार संबंधी मामला भी लंबे समय से अटका हुआ था। केंद्र पर उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के बाद उसकी समस्या का समाधान किया गया। अधिकारियों का कहना है कि पुराने आधार रिकॉर्ड वाले मामलों में जल्दबाजी के बजाय पूरी जानकारी की जांच जरूरी है।

रिकॉर्ड की सही जांच से सालों पुरानी परेशानी हो सकती है दूर

जबलपुर के DEGCM चित्रांशु त्रिपाठी ने बताया कि आधार केंद्रों पर ऑपरेटरों पर अधिक से अधिक मामले जल्द निपटाने का दबाव रहता है। सामान्य मामलों में यह प्रक्रिया आसान होती है, लेकिन पुराने रिकॉर्ड से जुड़े मामलों में सही जानकारी खोजने के लिए अतिरिक्त समय देना पड़ता है। कई बार दूसरे केंद्रों पर पर्याप्त समय नहीं मिल पाने के कारण छोटी तकनीकी समस्या भी वर्षों तक बनी रहती है।उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि आधार पहले बन चुका है तो दोबारा आवेदन करने के बजाय पुरानी रसीद और उपलब्ध दस्तावेज लेकर पहले रिकॉर्ड की जांच कराएं। रोहित का मामला बताता है कि सही रिकॉर्ड तक पहुंच बनाकर वर्षों पुरानी आधार संबंधी परेशानी का भी समाधान किया जा सकता है।

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