जबलपुरभोपालमध्य प्रदेशराज्य

यश भारत खास :  मध्य प्रदेश – छत्तीसगढ़ के बीच बसा छोटा कश्मीर कहा जा रहा नर्क का द्वार : रुकी विकास की रफ्तार ,मार्ग में चलना दूभर, स्कूली बच्चे परेशान

मंडला | जिले के अंतिम छोर में बसा वनांचल आदिवासी बाहुल्य विकासखंड मवई मध्यप्रदेश की अंतिम सीमा में बसा है। इसके बाद से छत्तीसगढ़ की सीमा लग जाती है। दो प्रदेशों के बीच में बसा यह आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र मवई आज भी विकास की दौड़ में पीछे है। जबकि इसे छोटा कश्मीर कहा जाता है लेकिन आज यह नरक का द्वार कहा जा रहा है ।मूलभूत सुविधाओं से यहां के वनांचल वासी वंचित है। मवई क्षेत्र में ऐसे कई दूरांचल ग्रामीण क्षेत्र है, जहां मूलभूत सुविधाएं नाम मात्र की है। कहीं पहुंच मार्ग नहीं है, तो कहीं आज भी अंधेरे में जीवन यापन किया जा रहा है, तो कहीं शुद्ध पेयजल के लिए लोग तरस रहे है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य समेत अन्य सुविधाएं इनके लिए एक सपनें जैसा बनकर रह गया है, यहां विकास की बातें ही की जाती है, लेकिन इनकी जमीनी हकीकत देखी जाए तो विकास के नाम पर शून्य है। 

 

 

जानकारी अनुसार जिला के अंतिम छोर में बसे विकासखंड मवई छोटा कश्मीर कहलाता है। यहां सबसे ज्यादा सरई के जंगल है, जिसके कारण यहां ठंडक बनी रहती है। मवई क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि भी महत्वपूर्ण भी है। यहां के जंगल की हरियाली यहां आने वाले लोगों को लुभाती है। इस क्षेत्र में ऐसे कई पर्यटन स्थल है, जिसकी ओर पर्यटक खींचे चले आते है। मवई क्षेत्र का प्राकृति नजारा देखते ही बनता है। जिसके कारण पर्यटक भी यहां की प्राकृतिक छटा को देखने दौड़े चले आते है। वहीं इस छोटा कश्मीर के कई वनांचल ग्राम आज भी मार्ग विहीन है। जहां पहुंच मार्ग नहीं बन सका है, ग्राम में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का बोर्ड तो लगा है, लेकिन यहां मार्ग नहीं है। विकासखंड मवई मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर बसा ग्राम पंचायत चांदगांव में ग्राम खम्हरिया है। इस ग्राम के मजरे, टोला में आज दिनांक तक कोई सड़क की सुविधा यहां के ग्रामीणों को नहीं मिल सकी है। मवई के अधिकत्तर गांव आदिवासी बाहुल्य ग्राम है। जिसमें ग्राम खम्हरिया भी है, यहां आदिवासी परिवार की संख्या ज्यादा है। खम्हरिया ग्राम के अंतर्गत तीन टोला बसे है, जिनमें आमाटोला, बर्राटोला और कक्ती खेरो टोला आते है। इन टोलों में करीब 50 परिवार निवास करते है, जिसकी जनसख्ंया करीब 300 है। बावजूद इसके इस ग्राम को मुख्य मार्ग से नहीं जोड़ा गया है। जिसके कारण इस टोला के लोगों को ग्राम खम्हरिया तक पहुंचने के लिए करीब तीन किलोमीटर कच्चा मार्ग तय करना पड़ता है। खम्हरिया ग्राम तक पूरा मार्ग कच्चा है। जिससे बारिश के दौरान यह मार्ग दलदल बन जाता है।

ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम चांदगांव के अंतर्गत ग्राम खम्हरिया आता है। खम्हरिया ग्राम के अंतर्गत बसे टोला की दूरी करीब तीन किलोमीटर है। इस तीन किलोमीटर का रास्ता पार करने के बाद ही खम्हरिया मुख्यालय से मार्ग पक्का मिलता है। खम्हरिया ग्राम के अंदर आमाटोला, बर्राटोला और कक्ती खेरो टोला आता है। इन टोलों के ग्रामीण पहुंच मार्ग नहीं होने के कारण परेशान हो रहे है। वहीं ग्राम के अंदर भी सीसी सड़क बनाई गई थी, लेकिन वह सड़क भी बदहाल हो गई है। ग्राम के अंदर बनी सड़क भी अब उबड़ खाबड़ मार्ग में तब्दील हो गई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि यहां के लोगों की परेशानी को देखते हुए यहां सड़क बनाई जाए।

 

दलदल में पैदल चलना हो रहा दूभर 

तीन किलोमीटर का यह मार्ग बारिश के दिनो में दलदल बन जाता है। स्थिति यह है कि सड़क से पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणो को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है लेकिन स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को शर्म तक नहीं आ रही है। बारिश के दौरान ग्रामीणों को अपना राशन लाने में भी भारी परेशानी उठानी पड़ी है। बारिश के सीजन में इस टोला तक कोई भी यात्री वाहन नहीं आता है, जिसके कारण करीब तीन किलोमीटर का मार्ग पैदल ही तय करना पड़ता है।

 

बच्चों की होती है पढ़ाई प्रभावित 

मंडला जिले के मवई ब्लॉक के ग्राम पंचायत चांदगांव के ग्राम खम्हरिया में बसे मजरे, टोला के ग्रामीण पहुंच मार्ग ना होने के कारण काफी परेशान है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान हमारे बच्चे स्कूल नहीं जा पाते है, जब तक मौसम साफ नहीं होता और मार्ग से पानी नहीं सूखता तब तक बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है।

समय पर नहीं मिलती स्वास्थ्य सुविधा 

ग्रामीणों ने बताया कि यदि ग्राम में कोई बीमार हो जाए तो अस्पताल जाने के लिए बड़ी परेशानी होती है। करीब तीन किलोमीटर का मार्ग कच्चा होने के कारण बारिश के दौरान यहां एम्बुलेंस भी नहीं पहुंच पाती है। जैसे तैसे मरीज को बमुश्किल से ग्राम खम्हरिया मुख्यालय तक लाना पड़ता है। इसके बाद भी कोई वाहन या एम्बुलेंस के सहारे मरीज को उपचार के लिए यहां से लेकर जाते है। यह तीन किलोमीटर की दूरी ग्रामीणों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। इमरजेंसी में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में भी काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है, लेकिन स्थानीय प्रशासन और जिला प्रशासन और यहां के जनप्रतिनिधि का इस ओर बिल्कुल ध्यान नहीं है।

 

इनका कहना है….

खम्हरिया ग्राम के अंतर्गत आने वाले टोला में निवास करते है, जिसकी दूरी करीब तीन किमी की है, बारिश में सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। मार्ग दलदल बन जाता है, स्कूल जाने में परेशानी उठानी पड़ती है। इस ओर किसी का ध्यान नहीं है।

अनुराग मसराम, छात्र

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button