विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस विशेष : मानसिक स्वास्थ्य – खामोशी में बढ़ती बीमारी, जागरूकता ही बचाव का रास्ता

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस विशेष : मानसिक स्वास्थ्य – खामोशी में बढ़ती बीमारी, जागरूकता ही बचाव का रास्ता
– तनाव, बेचैनी और निराशा को न करें नजरअंदाज, समय पर परामर्श और उपचार से मिल सकती है मदद – डॉ नामदेव

भोपाल, यशभारत। भागदौड़ भरी जिंदगी, काम का दबाव, बेरोजगारी और अपेक्षाओं पर खरा न उतर पाने की चिंता लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। मानसिक समस्याओं के बावजूद सामाजिक कलंक और भेदभाव के डर से कई लोग अपनी परेशानी साझा नहीं कर पाते। नतीजतन, समय पर सहायता नहीं मिलने से उनकी स्थिति गंभीर हो सकती है। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के उद्देश्य से हर साल 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। चिरायु मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल बैरागढ़ के सामुदायिक चिकित्सा विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ गरिमा नामदेव के मुताबिक मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वस्थ मानसिक स्थिति व्यक्ति को दूसरों के साथ बेहतर संबंध बनाने, रोजमर्रा की चुनौतियों का सामना करने और समाज में सकारात्मक योगदान देने में मदद करती है।
डॉ नामदेव ने बताया कि मानसिक परेशानी कई तरह से सामने आ सकती है। लगातार बेचैनी, नींद में बदलाव, निराशा, जीवन में रुचि कम होना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और नशीले पदार्थों के सेवन में बढ़ोतरी इसके संभावित संकेत हो सकते हैं। कुछ लोगों को सिरदर्द, पीठ दर्द और मांसपेशियों में दर्द जैसी शारीरिक परेशानियां भी महसूस हो सकती है।
तनाव और सामाजिक परिस्थितियां भी जिम्मेदार
मानसिक स्वास्थ्य पर व्यक्तिगत, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों का प्रभाव पड़ता है। लगातार तनाव, बेरोजगारी, आर्थिक कठिनाइयां, असफलता का दबाव और सामाजिक अलगाव मानसिक परेशानी बढ़ा सकते हैं। कुछ मामलों में आनुवंशिक, जैविक और गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताएं भी भूमिका निभा सकती हैं। हर व्यक्ति में बीमारी के कारण अलग-अलग हो सकते हैं।
सरकारी योजनाओं से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच
भारत में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 1982 में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसके बाद वर्ष 1996 में जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसका उद्देश्य जिला स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना था। अप्रैल 2017 में पारित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और प्रभावित व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कानूनी आधार प्रदान किया।
विशेषज्ञों के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए मनोचिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों, परामर्शदाताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और परिवार की संयुक्त भूमिका महत्वपूर्ण है। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में मानसिक स्वास्थ्य को शामिल करना और जरूरतमंद लोगों को सुलभ उपचार उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।
कलंक नहीं, सहयोग की जरूरत
मानसिक परेशानी से जूझ रहे व्यक्ति की बात ध्यान से सुनना, उसे दोष न देना और जरूरत पडऩे पर विशेषज्ञ तक पहुंचने में मदद करना समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बातचीत, समय पर परामर्श और उपचार के प्रति सकारात्मक सोच ही इस खामोश समस्या से निपटने की दिशा में प्रभावी कदम साबित हो सकते हैं।







