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भुखमरी की कगार पर वेयरहाउस संचालक, खाते हुए एनपीए

4 साल से अटके 10 हजार बिल, 130 करोड़ का भुगतान लंबित

भुखमरी की कगार पर वेयरहाउस संचालक, खाते हुए एनपीए

4 साल से अटके 10 हजार बिल, 130 करोड़ का भुगतान लंबित

जबलपुर, यश भारत। जिले के वेयरहाउस संचालक आज आर्थिक संकट के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। पिछले चार वर्षों से लगभग 130 करोड़ रुपए का भंडारण शुल्क भुगतान न होने के चलते वे अब भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि बैंक की किस्तें नहीं भर पाने से कई संचालकों के खाते एनपीए घोषित हो चुके हैं। कुछ संचालकों के गोदामों और मकानों की नीलामी की नौबत तक आ चुकी है। परेशान संचालक पिछले चार दिनों से वेयरहाउसिंग कारपोरेशन कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि पिछले चार साल से लगभग 10,000 बिल नागरिक आपूर्ति निगम में लंबित हैं, लेकिन आज तक किसी ने सुनवाई नहीं की।

सिर्फ जबलपुर में ही संकट

यह समस्या सिर्फ जबलपुर जिले तक सीमित है। प्रदेश के अन्य जिलों में भंडारण शुल्क का भुगतान 2 से 6 महीने की देरी से सही, लेकिन किया जा रहा है। जबकि जबलपुर में यह देरी तीन से चार साल तक खिंच चुकी है, जिससे वेयरहाउस संचालक अब आर्थिक रूप से टूट चुके हैं और परिवारों का भरण-पोषण तक मुश्किल हो गया है। इस तरफ जहां वेयरहाउस संचालक आर्थिक रूप से परेशान है वही किराया न मिलने के चलते गोदाम में रखा हुआ अनाज भी खराब हो रहा है क्योंकि उस पर समय से दबाओ  का छिड़काव नहीं हो रहा है।

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भुगतान की फाइलें विभागों में भटक रही

वेयरहाउस संचालकों का एग्रीमेंट वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के साथ होता है, लेकिन भुगतान की जिम्मेदारी नागरिक आपूर्ति निगम और मध्यप्रदेश विपणन संघ की होती है। संचालकों का कहना है कि शुरू में वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के चक्कर लगाए, फिर आपूर्ति निगम और विपणन संघ की ओर रुख किया — लेकिन हर विभाग ने जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टाल दी।
वेयरहाउसिंग कारपोरेशन का कहना है कि “जब तक संबंधित विभागों से राशि प्राप्त नहीं होती, भुगतान संभव नहीं”, जबकि नागरिक आपूर्ति निगम चार साल से धनराशि जारी नहीं कर पा रहा है। विपणन संघ सूखत का हवाला दे रहा है, जबकि संचालकों का कहना है कि इतनी  सूखत नहीं कि भुगतान असंभव हो।

धरना जारी, समाधान की उम्मीद दूर

लगातार बढ़ती आर्थिक तंगी के बावजूद संचालकों का कहना है कि वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। उनका साफ कहना है — “भुगतान हुए बिना हम यहां से नहीं हटेंगे।”धरना स्थल पर मौन प्रदर्शन जारी है, अब यह मौन सरकारी तंत्र की गूंगी व्यवस्था पर करारा सवाल बन चुका है। वही आने वाले दिनों में इस धरने के चलते राशन वितरण व्यवस्था और कस्टम मिलिंग भी प्रभावित हो सकती है।

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