व्हीएफजे ने बनाई सेना के लिए लाइट बुलेट प्रूफ व्हीकल, तुरंत पथरीली से लेकर दलदली भूमि में दुश्मनों के छुड़ा देगी छक्के
तुरंत पथरीली से लेकर दलदली भूमि में दुश्मनों के छुड़ा देगी छक्के

जबलपुर यश भारत। व्हीएफजे में सेना की महती जरूरत को ध्यान में रखते हुए ऐसा हल्का बुलेट प्रूफ व्हीकल तैयार किया है तो त्वरित कार्रवाई करने के लिए सक्षम है। दरअसल दशकों पहले सेना के लिए जोंगा ऐसा वाहन रहा जो छोटे से अधिकारी से लेकर बड़े अधिकारियों की पहली पसंद रहा ।समय के साथ पुरानी तकनीक और ईंधन की अधिक खपत के चलते वह चलन से बाहर हो गया तब से वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में अन्य वाहन उपयोग किये जा रहे हैं । लेकिन अब बदली परिस्थितियों में और सुरक्षित एवं सुगम वाहन की आवश्यकता सेना द्वारा महसूस की जा रही है ।
ऐसे लाइट व्हीकल के लिए तत्कालीन सीजीएम एस के भोला ने करीब दो साल पूर्व ऐसी परिकल्पना को साकार करने का बीड़ा उठाया और कई खूबियों वाली लाइट बुलेट प्रूफ व्हीकल तैयार हो गई। अभी तक सेना के मापदंड के अनुरूप उसका सफल समर ट्रायल राजस्थान जैसलमेर जैसे क्षेत्र में हो चुका है। जहां आमतौर पर 50डिग्री से अधिक तापमान रहता है। अब वही व्हीकल निर्माणी में आकर पुनः तैयार हो रही है ताकि लद्दाख जैसी ऊंची जगह पर जहां माइनस 50 डिग्री सेल्सियस तापमान होता है। विंटर सीजन में ट्राइल के लिए जायेगी।
कतिपय कारणों से बारीकी से उसकी खूबियों का खुलासा नहीं किया गया। लेकिन इतना जरूर कहा जा रहा है कि उक्त व्हीकल आधुनिक तकनीक से सुसज्जित है और उसका टरेट इतना अच्छा है कि जल्द ही जंगल, पहाड़ों और दुर्गम इलाकों में पहुंच सकती है । जानकारों का कहना है कि तत्कालीन सीजीएम एस के भोला के मन व्हीएफजे के लिए अनेक परिकल्पनाएं रही।टी सिरीज टेंक ओवर हालिंग की परिकल्पना भी उनमें से एक रही। जिसे उन्होंने तत्कालीन सीएमडी श्री द्विवेदी से बेहतर समन्वय बनाकर उसे धरातल पर उतारा जो आज व्हीएफजे के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई। उनकी ही सोच रही है कि व्हीएफजे के लिए ऐसे सहायक उद्योग स्थापित हों जो अग्रगामी आधुनिक तकनीक के पुर्जे और उपकरण बनायें।इसके लिए वे अपने समय में एमएमएई के अधिकारियों के साथ जिला प्रशासन के अधिकारियों से भी अनेक दौर की चर्चा कर चुके हैं ।
बहरहाल जानकार ऐसा विश्वास दिला रहे हैं कि अनेक तकनीकी खूबियों वाली लाइट बुलेट प्रूफ व्हीकल सेना की पहली पसंद बनेगी।






