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मर्डर केस में ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा, एम.पी. हाईकोर्ट ने आरोपियों को किया दोषमुक्त

जबलपुर। High Court of Madhya Pradesh की डिवीजन बेंच ने एक महत्वपूर्ण आपराधिक अपील में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को निरस्त करते हुए आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। यह फैसला माननीय न्यायमूर्ति Justice Vivek Agarwal एवं माननीय न्यायमूर्ति Justice Avanindra Kumar Singh की खंडपीठ द्वारा दिनांक 04 मई 2026 को पारित किया गया।
मामला वर्ष 2013 के कथित हत्या प्रकरण से संबंधित था, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपियों आधार सिंह एवं पूरन सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 एवं 201 के अंतर्गत दोषसिद्ध कर आजीवन कारावास से दंडित किया गया था।
अपील की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि अभियोजन पक्ष घटना की परिस्थितियों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा है। मेडिकल साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान तथा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों में गंभीर विरोधाभास पाए गए। कई महत्वपूर्ण गवाह अभियोजन का समर्थन नहीं कर सके तथा डॉक्टर द्वारा मृत्यु के कारण को स्पष्ट रूप से हत्या नहीं बताया गया।

खंडपीठ ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन यह सिद्ध नहीं कर पाया कि मृतक की मृत्यु दुर्घटनावश हुई अथवा हत्या के कारण। न्यायालय ने यह भी माना कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की श्रृंखला पूर्ण नहीं थी और संदेह से परे अपराध सिद्ध नहीं किया जा सका।
न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित निर्णय Sharad Birdhichand Sarda v. State of Maharashtra का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल मजबूत और पूर्ण परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर ही दोषसिद्धि संभव है। अंततः हाईकोर्ट ने दोनों अपीलों को स्वीकार करते हुए आरोपियों को धारा 302 एवं 201 IPC के आरोपों से बरी कर दिया !!
इस प्रकरण में अपीलकर्ता आधार सिंह की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय तथा अपीलकर्ता पूरन सिंह की ओर से अधिवक्ता आनंद कुमार शुक्ला आशीष त्रिवेदी असीम त्रिवेदी एवं प्रशांत अवस्थी ने पक्ष रखा।

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