पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघिन की मौत, 12 साल के अंदर गई 24वीं जान
पेड़ के नीचे बेहोश पड़ी मिली

जबलपुर ,यश भारत पीलीभीत टाइगर रिजर्व (PTR) की माला रेंज में गंभीर रूप से घायल हालत में मिली 5 साल की बाघिन की इलाज के दौरान मौत हो गई। टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर और डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर मनीष सिंह ने बताया कि बाघिन की मौत 25 जुलाई 2026 की रात को हुई। बाघिन के शव को पोस्टमार्टम के लिए बरेली स्थित इंडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (IVRI) भेजा गया।
गश्त के दौरान मिली थी घायल
मनीष सिंह ने बताया कि मौत का सही कारण शव परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा, प्रारंभिक आकलन से पता चलता है कि उसे किसी दूसरे बाघ के साथ क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान चोटें लगी होगी। बाघिन वन अधिकारियों को नियमित गश्त के दौरान घायल अवस्था में मिली थी।
पेड़ के नीचे बेहोश पड़ी मिली
वन अधिकारियों के मुताबिक बाघिन की हालत बहुत गंभीर थी। वह एक पेड़ के नीचे बेहोश पड़ी थी और उसके एक कान के अंदरूनी हिस्से के पास गहरा घाव था जिसमें कीड़े पड़ गए थे। सिंह ने बताया कि बाघिन के इलाज के लिए दक्ष गंगवार की अगुवाई में पांच सदस्यों वाली पशु-चिकित्सकों की एक टीम बनाई गई थी, लेकिन लगातार कोशिशों के बावजूद उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और शनिवार देर रात उसकी मौत हो गई।
120 किलो ही रह गया था वजन
बता दें कि घायल बाघिन का डॉ. दक्ष गंगवार ने उपचार किया, लेकिन एक बार भी उसके शरीर में हलचल नहीं हुई। एक्सपर्ट्स के मुताबिक सामान्य तौर पर बाघिन का औसत वजन 150 से 160 किलो होता है मगर, उसका सिर्फ 120 किलो रह गया। गंभीर घायल होने के कारण वह शिकार नहीं कर पा रही थी। यह भी बताया जा रहा है कि बीते 12 सालों में टाइगर रिजर्व में आपसी संघर्ष में यह 24वीं मौत है।







