नाना के सहारे तीन नाबालिग बच्चे, मुआवजा जाने के लिए लड़ रहे जंग, हाईकोर्ट ने संभाला था पक्ष, फिर भी नहीं हो सका दस्तावेजों पर फैसला

जबलपुर। सड़क हादसे में माता-पिता को खो चुके तीन नाबालिग बच्चों का जीवन पिछले कई वर्षों से मुआवजे की राशि पाने की कानूनी लड़ाई में उलझा हुआ है। बच्चों की परवरिश उनके नाना के सहारे चल रही है, लेकिन अब तक उन्हें न्याय और आर्थिक सहायता पूरी तरह नहीं मिल सकी है। मामला वर्ष 2016 में हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें बच्चों के माता-पिता की मौत हो गई थी। इसके बाद परिजनों ने मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण के तहत मुआवजे के लिए आवेदन किया था। बताया जाता है कि हाईकोर्ट तक मामला पहुंचा और वहां से बच्चों के हित में आदेश भी पारित हुए, लेकिन दस्तावेजी प्रक्रिया और प्रशासनिक अड़चनों के चलते आज तक अंतिम भुगतान नहीं हो सका।
परिजनों का आरोप है कि कई बार संबंधित विभागों और अधिकारियों के चक्कर लगाने के बाद भी समाधान नहीं निकला। बच्चों के नाना का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ जिम्मेदारियां बढ़ती जा रही हैं, लेकिन सरकारी प्रक्रिया इतनी धीमी है कि उन्हें हर तारीख पर सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। इधर सामाजिक संगठनों और अधिवक्ताओं का कहना है कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता दिखाते हुए प्रशासन को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। बच्चों की शिक्षा और भविष्य सीधे तौर पर इस मुआवजे की राशि पर निर्भर है। मामले को लेकर अब फिर से न्यायालय में सुनवाई की तैयारी की जा रही है, ताकि वर्षों से लंबित मुआवजा राशि बच्चों तक पहुंच सके।







