
रामनगर/बाराबंकी:- रामनगर तहसील परिसर गुरुवार को उस समय गरमा गया जब भारतीय किसान यूनियन (भानू) के राष्ट्रीय महासचिव आशू चौधरी के नेतृत्व में सैकड़ों किसान समस्याओं का पुलिंदा लेकर धरने पर बैठ गए। किसानों का गुस्सा ऐसा था कि तहसील परिसर नारेबाजी से गूंज उठा और प्रशासन को भारी पुलिस फोर्स तैनात करनी पड़ी।
धरने के दौरान किसानों ने अफसरशाही, शिक्षा व्यवस्था, खाद-बीज संकट, बिजली कटौती और भ्रष्टाचार को लेकर जमकर हमला बोला। किसानों ने कहा कि गरीबों के बच्चों को शिक्षा का अधिकार सिर्फ कागजों तक सीमित है। निजी स्कूल खुलेआम आरटीई कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
किसानों ने मांग उठाई कि गरीब छात्र-छात्राओं को निजी विद्यालयों में मुफ्त प्रवेश दिलाया जाए और नियमों का पालन न करने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई हो। साथ ही निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि और ड्रेस-किताबें तय दुकानों से खरीदने की मजबूरी खत्म करने की मांग भी जोरदार ढंग से उठाई गई।
धरने में किसानों का दर्द बिजली, खाद और बीज को लेकर भी छलका। किसानों ने कहा कि समय से खाद-बीज नहीं मिलने से खेती प्रभावित हो रही है, ऊपर से बिजली कटौती ने ग्रामीण इलाकों का हाल बेहाल कर दिया है। किसानों ने तहसील और ब्लॉक स्तर पर किसान सहायता केंद्र खोलने तथा सरकारी अधिकारियों द्वारा किसानों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने की मांग की।
सबसे ज्यादा चर्चा उस वक्त हुई जब किसानों ने ज्ञापन के जरिए वर्तमान एसडीएम रामनगर के नवाबगंज तहसील में तैनाती के दौरान किए गए कार्यों की जांच कराने की मांग भी उठा दी। इस मांग के बाद तहसील परिसर में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।
धरने में मंडल अध्यक्ष रवि वर्मा, प्रदेश महामंत्री खालिद खान, युवा मंडल अध्यक्ष सोनू शर्मा, प्रदेश महासचिव रणवीर सिंह, तहसील अध्यक्ष संदीप सिंह समेत बड़ी संख्या में किसान नेता मौजूद रहे। महिलाओं की भागीदारी ने भी आंदोलन को और मजबूत बना दिया।
धरने को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। जगत राम कन्नौजिया, गरिमा पंत समेत कई थानों की पुलिस और महिला पुलिस बल तहसील परिसर में तैनात रहा। अंत में किसानों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन एसडीएम फतेहपुर कार्तिकेय सिंह को सौंपकर जल्द कार्रवाई की मांग की।







