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आंधी के साथ हुई बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता छप्पर उड़े. पेड़ गिरे. अनेक ग्राम अंधकार में डूबे रहे

जबलपुर यशभारत।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में हुई बे मौसम बारिश ने बड़े पैमाने पर खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया है। वहीं तेज आंधी तूफान से घरों के छप्पर उड़ गए एवं अनेक पेड़ गिर गए इसके साथ ही बोरिया भिलौदा कुशली मुरई सरा गनियारी कंकरखेड़ा सहित आधा सैकड़ा गांव अंधकार में डूबे रहे। विद्युत की आंख मिचौली होने से ग्रामीणों को इस भीषण गर्मी में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
तेज आंधी तूफान के साथ हुई बारिश ने किसानों को एक बार पर चिंता में डाल दिया। खेतों में लगी उड़द मूंग की फसल जमीन में गिर गई वही जो फसल किसानों द्वारा पूर्व में काटकर खेत में रखी थी उसमें भी भारी नुकसान होने की संभावना किसानों द्वारा बताई जा रही है।
इस संबंध में उड़द मूंग की खेती करने वाले अरुण सिंह मनीष ठाकुर सत्यम राजपूत महेश राजपूत कुशली ने जानकारी मैं बताया कि इस वर्ष उड़द मूंग की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद थी किंतु जिस तरह से गत सायं को भारी बारिश हुई उससे किसानों के माथे पर एक बार फिर चिंता की लकीरें खींच गई हैं। जिसमें खेतों में खड़ी फसल प्रभावित हुई हैं। अनेक गांवों में भारी बारिश की खबर है। आने वाले दिनों में और अधिक बारिश होती है तो किसानों के सामने एक जटिल समस्या खड़ी हो जाएगी। जिसमें किसानों द्वारा लगाई गई उड़द मूंग की फसल में लागत भी निकालने की उम्मीद नहीं रहेगी।
पैदावार में आएगी गिरावट
इस संबंध में उड़द मूंग की खेती करने वाली किसानों ने बताया कि इस खेती के लिए प्रति एकड़ 15 से 20 हजार रुपए की लागत लगती है। तब कहीं जाकर फासले तैयार होती है। लेकिन जिस तरह से सोमवार की शाम बारिश हुई है उससे किसने की धड़कनें और तेज हो गई है।
फूल पर पड़ा असर
किसानों के अनुसार 2 घंटे तक हुई बारिश के कारण जिन फसलों में फूल आ गया था वह झड़ गया है। इसके कारण पैदावार में काफी गिरावट आएगी। वही किसानों ने यह भी बताया कि यदि मौसम साफ रहता तो प्रति एकड़ 4 से 5 क्विंटल मूंग की पैदावार हो जाती है। यही हाल उड़द की खेती करने वालों का है जिसमें भी इस बारिश का काफी असर पड़ेगा।किसानों ने खेतों में रखी कटी हुई उड़द मूंग को नुकसान हुआ है।जबकि बिना काटी गई उड़द की फसल अब भी खेतों में पड़ी है। जिसे आगे नहीं काटा जा सकता है। इसके साथ ही दाने में चटकन भी आ जाएगी। इस तरह से इस हुई बे मौसम बारिश नहीं किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है।

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