स्वामित्व योजना अटकी, पटवारियों के विरोध से 9वें दिन भी नहीं हुई एक भी रजिस्ट्री

जबलपुर, यश भारत । मध्य प्रदेश में ग्रामीण आबादी को मालिकाना हक देने के लिए शुरू की गई ‘स्वामित्व योजना’ के तहत पट्टों की रजिस्ट्री का काम सरकार और पटवारियों के बीच जारी खींचतान के कारण पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। 17 सितंबर से शुरू हुए इस विशेष अभियान के नौ दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है और एक भी रजिस्ट्री निष्पादित नहीं हो सकी है। विवाद का मुख्य कारण रजिस्ट्री में पटवारी को ‘निष्पादक’ (विक्रेता/अधिकारी) बनाए जाने का प्रावधान है।
पटवारियों का तर्क है कि भविष्य में जमीन से जुड़े किसी कानूनी विवाद या कोर्ट-कचहरी के मामलों में उन्हें घसीटा जा सकता है। इसलिए वे मांग कर रहे हैं कि रजिस्ट्री पटवारी के नाम से न होकर ‘मध्य प्रदेश शासन’ के नाम से दर्ज हो। हालांकि भोपाल में पांच मंत्रियों के समूह के साथ हुई बैठक में पटवारियों को मौखिक आश्वासन दिया गया कि विवाद की स्थिति में सरकार उनका बचाव करेगी और नियमों में संशोधन किया जाएगा, लेकिन पटवारी संघ केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं है। वे जब तक आधिकारिक राजपत्र/नोटिफिकेशन जारी नहीं होता, तब तक काम पर लौटने को तैयार नहीं हैं।
इस हड़ताल और गतिरोध के कारण अकेले जबलपुर जिले में करीब 12 से 13 हजार स्वामित्व अधिकारों की रजिस्ट्रियां अटकी हुई हैं। वहीं पूरे प्रदेश में लाखों ग्रामीण हितग्राही अपने मुफ्त मालिकाना हक के दस्तावेज पाने के लिए इंतजार करने को मजबूर हैं







