जबलपुरमध्य प्रदेशराज्य

स्वच्छ भारत अभियान : लोग जागरूक नहीं, फिर कैसे आएंगे नंबर वन

शहर में लोगों की सुविधा के लिए रखे गए संसाधनों का उपयोग नहीं , फेंक दिया नालों में

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जबलपुर,यशभारत। स्वच्छ भारत अभियान को लेकर लगातार नगर निगम प्रयास कर रहा है, परंतु लोगों की जागरूक नहीं होने के कारण सारे प्रयास फेल साबित होते दिख रहे हैं। कहा जा रहा है कि लोगों की सुविधा के लिए जो संसाधन स्थापित किए गए थे उन्हें कहीं नाले में डाल दिया गया है या फिर कचरे में फेंक दिया गया है।
आलम ये है कि सार्वजनिक-सामुदायिक शौचालय की देखरेख करने वाले यहां रहते तो हैं लेकिन साफ-सफाई करने का जिम्मा उठाने की जहमत कोई नहीं कर रहा है। इसके साथ ही मेडिकल के पीछे नगर निगम प्रशासन के द्वारा सड़क किनारे लगाए गए प्लास्टिक के केबिन तो कचरा घर में पड़े हुए हैं जिनकी देखरेख करने का भी कोई जिम्मेदार बीड़ा नहीं उठा रहा है। स्वच्छता का पूरा ध्यान रखने का दावा करने वाले भी नजर नहीं आ रहे हैं। यशभारत की टीम के द्वारा किए गए निरीक्षण से यह जानकारियां मिली हैं।
शराबखोरी का अड्डा बने र्सावजनिक शौचालय
शहर के सार्वजनिक शौचालयों की हालत इन दिनों खराब होती चली जा रही है। आलम ये है कि इन दिनों शाम ढलते ही कई शौचालय शराबखोरी का अड्डा बन रहे हैं। जिनमें गुलौआ चौक के पास स्थित शौचालय, लिंक रोड के पास का शौचालय शामिल हैं। रात के वक्त यहां शराबियों का जमावड़ा लगने लगता है और फिर जमकर शराबखोरी होती है।
थर्ड जेंडर के लिए भी होगी व्यवस्था
जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन के मुताबिक र्सावजनिक शौचालयों में थर्ड जेंडर के लिए भी एक सीट की व्यवस्था की जाने की बात की गई थी। जिसके बाद नगर निगम जबलपुर ये व्यवस्था करने में जुआ हुआ है।

शौचालयों में पसरी रहती है गंदगी
जानकारी के अनुसार शहर के कुछ ही सार्वजनिक, सामुदायिक शौचालयों की स्थिति भी खराब है। यहां अधिकांशत: गंदगी पसरी रहती है न तो यहां सफाई होती है और न ही पानी की पर्याप्त व्यवस्था। जिस कारण लोग ऐसे गंदे शौचालयों में आना पसंद ही नहीं करते हैं।
हर एक किलोमीटर के अंतराल में नहीं है शौचालय
करीब 81 सार्वजनिक शौचालय और 100 सामुदायिक शौचालय बनवाए हैं। नियमानुसार हर एक किलोमीटर के अंतराल में एक सार्वजनिक शौचालय होना चाहिए। लेकिन जब यशभारत की टीम ने शहर के कई क्षेत्रों का भ्रमण किया तो जो हकीकत सामने निकलकर आई वो हैरान कर देने वाली रही। सामने आया कि हर एक किलोमीटर के अंतराल में शौचालय हैं ही नहीं। हम बात करें गोरखपुर से मेडिकल तक के लंबे क्षेत्र की तो इसके बीच मुश्किल से एक-दो सार्वजनिक शौचालय ही हैं। जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विदित हो कि जबलपुर शहर की जनसंख्या करीब 20 लाख से अधिक है।

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