भोपालमध्य प्रदेश

सुभाष नगर एमपी नगर चौराहा बना दुर्घटनाओं का हॉटस्पॉट

सुभाष नगर एमपी नगर चौराहा बना दुर्घटनाओं का हॉटस्पॉट
– सिग्नल गायब, पुलिस नदारद, लोग हो रहे परेशान
यश भारत भोपाल। राजधानी का सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण मार्ग माने जाने वाले सुभाष नगर से एमपी नगर जाने वाला चौराहा इन दिनों एक बड़े संकट में बदल चुका है। यहां ट्रैफिक सिग्नल ही नहीं है, जिसके कारण रोज़ाना दुर्घटनाएं, जाम और अव्यवस्था की समस्याएं चरम पर हैं। शहर की तेजी से बढ़ती यातायात संख्या के बीच यह चौराहा प्रशासनिक लापरवाही का एक जीवंत उदाहरण बन गया है, जहां लोग जान जोखिम में डालकर रोज़ गुजरने को मजबूर हैं।

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लगातार आने-जाने वाले वाहन, बिना किसी संकेतक के चारों दिशाओं से तेजी से प्रवेश करते हैं। सुबह-शाम ऑफिस आवागमन के समय यह चौराहा ‘अव्यवस्था के चक्कर’ में पूरी तरह फँस जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, “यहां हर दूसरे दिन दुर्घटना होती है, लेकिन किसी भी अधिकारी की नजऱ नहीं पड़ती।” दोपहिया वाहन चालकों और छात्रों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है, क्योंकि जाम के दौरान कई बार वाहन आपस में टकरा जाते हैं और स्थिति बेहद खतरनाक हो जाती है।
चौराहे की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इतनी गंभीर ट्रैफिक समस्या के बावजूद एक भी ट्रैफिक पुलिसकर्मी मौके पर तैनात नहीं किया जाता। वहीं, इससे कुछ ही दूरी पर डीबी मॉल के सामने नियमित रूप से शाम को हेलमेट चेकिंग अभियान चलता रहता है। इस दोहरापन पर लोग खुलकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि हेलमेट चेकिंग से पहले ट्रैफिक प्रबंधन और दुर्घटना रोकथाम जरूरी है, लेकिन पुलिस सिर्फ चालान पर ध्यान देती है, ट्रैफिक सुव्यवस्था पर नहीं।
व्यापारी संगठनों और आसपास के रहवासियों ने कई बार शिकायतें की हैं कि ट्रैफिक सिग्नल के अभाव में न सिर्फ दुर्घटनाएँ बढ़ी हैं, बल्कि चौराहे पर रोजाना लंबा ट्रैफिक जाम भी लगता है। इससे मरीजों को अस्पताल पहुंचने में देर होती है और स्कूल बसें भी घंटों उलझकर खड़ी रहती हैं। जाम के दौरान कई वाहन चालक नियमों की अनदेखी करते हुए गलत दिशा से गाड़ी निकालने की कोशिश करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावनाएँ और बढ़ जाती हैं।
एमपी नगर क्षेत्र में डिब्बा मॉल, निजी ऑफिस, बैंक, कोचिंग संस्थान और सरकारी दफ्तरों के कारण दिनभर भारी यातायात रहता है। इसके बावजूद चौराहे पर न सिंक्रोनाइज्ड सिग्नल है, न ज़ैबरा क्रॉसिंग, न डायरेक्शन बोर्ड। विशेषकर शाम 6 से 9 बजे का समय सबसे अधिक भारी पड़ता है, जब जाम की लंबाई कई बार 500 मीटर से ज़्यादा तक पहुँच जाती है।
ट्रैफिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस चौराहे पर एक उच्च क्षमता वाला स्मार्ट सिग्नल, बैरिकेडिंग और डायरेक्शनल रोडमैप की तत्काल आवश्यकता है। साथ ही पीक आवर्स में ट्रैफिक पुलिस की सक्रिय मौजूदगी बेहद जरूरी है। यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो यह चौराहा शहर का सबसे खतरनाक ब्लैक स्पॉट बन सकता है। यातायात की इस अव्यवस्था से लोग बेहद परेशान हैं और प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। शहरवासियों का कहना है कि सडक़ सुरक्षा का मतलब केवल चालान काटना नहीं, बल्कि दुर्घटनाओं को रोकना है।

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