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समुद्री प्रदूषण पर सख्ती: केंद्र के नए नियम, तेल रिसाव पर लगेगा भारी जुर्माना

समुद्री जीवन पर खतरा

नई दिल्ली। भारत में समुद्री प्रदूषण को लेकर केंद्र सरकार ने पहली बार कड़े नियम लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पर्यावरण मंत्रालय ने अपतटीय तेल अन्वेषण, जहाज दुर्घटनाओं और पाइपलाइन रिसाव से होने वाले तेल प्रदूषण के प्रबंधन के लिए नए मसौदा नियम जारी किए हैं।

इन नियमों के तहत तेल रिसाव से बनने वाले टार बॉल्स (तारकोल के गोले) के संग्रह, परिवहन और पर्यावरण के अनुकूल निपटान को अनिवार्य किया गया है। यह पहली बार है जब इस तरह के प्रदूषण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और जिम्मेदारियां तय की गई हैं।

समुद्री जीवन पर खतरा

टार बॉल्स समुद्री और तटीय प्रदूषण का बड़ा कारण बनते हैं, जिससे तटीय पक्षियों, समुद्री कछुओं और अन्य समुद्री जीवों के अस्तित्व पर खतरा मंडराता है। खासतौर पर महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात और कर्नाटक के समुद्र तट मानसून के दौरान इससे अधिक प्रभावित होते हैं।

सख्त दंड प्रावधान लागू

सरकार ने “प्रदूषण फैलाने वाला भुगतान करेगा” सिद्धांत के तहत उल्लंघन करने वाले तेल संयंत्र मालिकों पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाने का प्रावधान भी किया है। साथ ही राज्य सरकारों, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और भारतीय तटरक्षक बल को इस दिशा में विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं विशेषज्ञों का मानना है कि इन नए नियमों के लागू होने से समुद्री प्रदूषण पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

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