दक्षिण भारत की रॉक आगमा छिपकली सतपुड़ा के जंगल में आई नजर – गर्म स्थानों पर चट्टान व खुरदुरे स्थान पर बनाया आवास

दक्षिण भारत की रॉक आगमा छिपकली सतपुड़ा के जंगल में आई नजर
– गर्म स्थानों पर चट्टान व खुरदुरे स्थान पर बनाया आवास
भोपाल। दक्षिण भारत के शहरी क्षेत्रों में पाई जानी वाली रॉक आगमा यानी बड़ी छिपकली सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के जंगलों में नजर आई है। एसटीआर के गश्ती दल ने रॉक आगमा को अपने कैमरे में कैद किया है। आम तौर पर गर्म स्थानों पर रहने वाली रॉक अगमा का सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के जंगल में दिखना अच्छा संकेत माना जा रहा है। जानकारों के मुताबिक एसटीआर की जलवायु वन्यप्राणियों और जीव जंतुओं के लिए अनुकूल मानी जाती है।
भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएसी) बेंगुलरु के सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंसेज के अध्ययन में सामने आया है कि शहरी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में रहने वाली छिपकली रॉक आगमा असामान्य परिस्थितियों में अनुकूलन स्थापित करने और सुकून भरी नींद के लिए ऐसे आवास का चयन करती है जो सतह के प्रकार, प्रकाश और तापमान की मात्रा के मामले में ग्रामीण क्षेेत्रों में रहने वाली उनके जैसी दूसरी छिपकलियों के आवास से मिलते जुलते हैं।
कीट पतंगों की भरमार
एसटीआर एसडीओ अंकित जामोद का कहना है कि छिपकली के नजर आते ही इसे कैमरे में कैद किया गया ताकि यहां पर्यटक जीव जंतुओं से परिचित हो सकें। विभागीय वेबसाइट भी इस छिपकली की जानकारी आपलोड की जाएगी। रॉक आगमा छिपकली का पसंदीदा भोजन कीट पतंगें होते हैं। सपतुड़ा टाइगर रिजर्व की हरियाली के कारण यहां कीट पतंगें बहुतायत में हैं। भोजन की आसानी से उपलब्धता के कारण रॉक आगमा की संख्या भी अब नजर आने लगी है। एसटीआर प्रबंधन का दावा है कि पहली बार यह छिपकली नजर आई है। इसे दुलर्भ प्रजाति के जीव की श्रेणी में रखा गया है।
गर्म स्थानों का चयन करती है छिपकली
अध्ययन में सामने आया है कि रॉक आगमा छिपकली आम तौर पर गर्म स्थान का चयन अपने आराम के लिए करती है। नींद हर जीव के लिए जरूरी होती है। रॉक आगमा को सुस्त जीव के नाम से भी जाना जाता है। प्राकृतिक आवास स्थालों से मेल खोने वाली परिस्थतियों को ढूंढकर अपने आवास का चयन भी करती है। आम तौर पर खुरदुरे क्रांकीट, ब्लॉक का चयन करती है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के जंगल में इस तरह के कई स्थान है जो कि रॉक आगमा के आवास के लिए अनुकूल पाए गए हैं।






