ग्रामीण विकास को नई दिशा देने की तैयारी, पंचायतों में शुरू होंगे आधुनिक सुविधाओं वाले मॉडल प्रोजेक्ट

ग्रामीण विकास को नई दिशा देने की तैयारी, पंचायतों में शुरू होंगे आधुनिक सुविधाओं वाले मॉडल प्रोजेक्ट
भोपाल, यश भारत। राजधानी भोपाल के ग्रामीण क्षेत्रों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में प्रशासन ने नई रणनीति तैयार की है। कलेक्टर मिश्रा ने जिला पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर और सुविधायुक्त बनाने के लिए दीर्घकालीन कार्ययोजना पर तेजी से काम किया जाए। बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने स्वच्छता अभियान को प्रभावी बनाने और जल संरक्षण कार्यों में तेजी लाने पर विशेष चर्चा हुई। कलेक्टर ने कहा कि अब गांवों में भी ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की जानी चाहिए जिससे लोगों को शिक्षा, पेयजल, स्वच्छता और परिवहन जैसी सुविधाओं के लिए शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। पंचायतों में शुरू होंगे पायलट प्रोजेक्ट , प्रशासन ने कई ग्राम पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी की है। इसके तहत स्कूल परिवहन पेयजल आपूर्ति और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी योजनाओं को एकीकृत मॉडल के रूप में लागू किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत सभी पंचायतों में स्वच्छता संबंधी कार्य तय समय सीमा में पूरे हों। आंगनबाड़ी केंद्रों को स्कूल परिसरों से जोड़ने की योजना पर भी चर्चा हुई ताकि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक और पोषण संबंधी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा सकें। फसल अवशेष से ऊर्जा उत्पादन की योजना, बैठक में नरवाई प्रबंधन को लेकर भी अहम चर्चा हुई। कलेक्टर ने कहा कि फसल अवशेषों को जलाने की बजाय उनका उपयोग सीएनजी उत्पादन में किया जाए। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा और पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी। प्रशासन ने कृषि विभाग और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर इस दिशा में पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। महिलाओं की आय बढ़ाने पर जोर , राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत कार्यरत बैंक सखियों को बीमा सेवाओं से जोड़ने की योजना भी तैयार की जा रही है। प्रशासन का मानना है कि इससे ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि होगी और उन्हें रोजगार के अतिरिक्त अवसर मिल सकेंगे। जल संरक्षण कार्यों में तेजी , बैठक में जल गंगा संवर्धन अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि तालाबों, बावड़ियों और नदियों के संरक्षण, गहरीकरण और सफाई कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाए। अजनाल और हलाली जैसी जल संरचनाओं के पुनर्जीवन पर भी विशेष फोकस रखा गया है। कलेक्टर ने कहा कि ग्राम पंचायतों में जैव विविधता संरक्षण से जुड़े अधिकारों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों का संतुलन भी बनाए रखा जा सके।







